देहरादून ; 22.08.2026,
देहरादून। उत्तराखंड में सड़कों पर वाहनों की निगरानी व्यवस्था को अब एक नए डिजिटल ढांचे से जोड़ने की तैयारी है। प्रदेश में लगे ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों से मिलने वाले वाहन संबंधी आंकड़ों को अलग-अलग सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम के साथ साझा करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल यातायात नियमों की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर अनुपालन, खनन गतिविधियों और पुलिस जांच को भी तकनीक के माध्यम से मजबूत करना है।
परिवहन विभाग इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) के सहयोग से प्रक्रिया तैयार कर रहा है। सरकार की योजना के अनुसार ANPR से कैप्चर होने वाले वाहन नंबरों को संबंधित विभागों के उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकेगा। इससे किसी वाहन के बारे में आवश्यक जानकारी सामने आने पर संबंधित विभाग अपने स्तर पर आगे की कार्रवाई कर सकेंगे।
एक कैमरा, कई विभागों के काम आएगा डेटा
ANPR कैमरे सड़क से गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को स्वचालित तरीके से पढ़कर उसका रिकॉर्ड तैयार करते हैं। उत्तराखंड में इस तकनीक का इस्तेमाल पहले से विभिन्न स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक वाहन निगरानी के लिए किया जा रहा है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार प्रदेश में 10 स्थानों पर ANPR कैमरे स्थापित किए गए हैं और इनसे मिलने वाले डेटा का उपयोग परिवहन के अलावा राज्य कर, पुलिस, भू-तत्व एवं खनन तथा पर्यटन विभाग भी कर सकते हैं।
अब प्रस्तावित डिजिटल एकीकरण से इस व्यवस्था को ज्यादा उपयोगी बनाने पर जोर है। उदाहरण के तौर पर सड़क पर किसी ऐसे वाहन की पहचान होती है, जिसके संबंध में टैक्स या परमिट से जुड़ी जानकारी संदिग्ध है, तो संबंधित विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच कर सकता है। इसी तरह खनन सामग्री ढोने वाले वाहनों की आवाजाही और वैध दस्तावेजों की जांच में भी यह तकनीक मददगार हो सकती है।
कर चोरी और अवैध खनन पर नजर रखने में मदद
राज्य कर विभाग के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है। वाहन की आवाजाही से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को कर संबंधी जानकारी से मिलाकर ऐसे मामलों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है, जहां वाहन या कारोबारी गतिविधि से जुड़ी जानकारी में असंगति दिखाई दे।
वहीं, खनन विभाग के लिए खनिज सामग्री ले जाने वाले वाहनों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। उत्तराखंड में अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण को रोकने के लिए अलग नियम और प्रवर्तन व्यवस्था पहले से लागू है। ANPR आधारित निगरानी इस व्यवस्था को सड़क स्तर पर अतिरिक्त डिजिटल सपोर्ट दे सकती है।
पुलिस को भी मिलेगी जांच में तकनीकी मदद
पुलिस के लिए वाहन नंबर किसी जांच का महत्वपूर्ण सुराग होता है। ANPR नेटवर्क से मिलने वाली सूचनाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने पर संदिग्ध या वांछित वाहनों की पहचान में तेजी आ सकती है। इसके अलावा यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को मजबूत किया जा सकेगा। परिवहन विभाग के उपलब्ध विवरण में ANPR व्यवस्था के तहत ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे उल्लंघनों की निगरानी का उल्लेख है।
डेटा सुरक्षित रखने के लिए बनेगा डिजिटल आधार
इस पूरी व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल कैमरों से वाहन नंबर पढ़ना नहीं, बल्कि उससे जुड़े डेटा को सुरक्षित तरीके से संग्रहित और जरूरत के अनुसार अधिकृत विभागों तक पहुंचाना है। उत्तराखंड का राज्य डेटा सेंटर सुरक्षित डेटा स्टोरेज और विभिन्न सरकारी विभागों के एप्लीकेशन को साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर संचालित करने की सुविधा देता है।
ITDA राज्य में ई-गवर्नेंस और आईटी परियोजनाओं की नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है तथा सुरक्षित डेटा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास में भूमिका निभाता है। ऐसे में ANPR डेटा को विभागीय प्रणालियों से जोड़ने में तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी अहम होगी।
सड़क निगरानी से आगे बढ़ेगी व्यवस्था
उत्तराखंड में ANPR का इस्तेमाल अब केवल ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान तक सीमित रखने के बजाय इसे बहु-विभागीय निगरानी प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा दिखाई दे रही है। यदि अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड आपस में प्रभावी ढंग से जुड़ते हैं, तो सड़क पर किसी वाहन की मौजूदगी से संबंधित कई स्तर की जानकारी डिजिटल जांच के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
इससे मौके पर मैनुअल जांच का दबाव कम करने, संदिग्ध वाहनों की पहचान तेज करने और सरकारी प्रवर्तन व्यवस्था को डेटा आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस तरह की व्यवस्था में डेटा की सुरक्षा, अधिकृत विभागों तक सीमित पहुंच और उसके इस्तेमाल के स्पष्ट नियम भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।
उत्तराखंड में परिवहन सेवाओं के डिजिटल विस्तार की प्रक्रिया पहले से चल रही है और 2026 में राज्य में ई-डिटेक्शन सिस्टम भी लागू किया गया है। ऐसे में ANPR नेटवर्क का दूसरे विभागों के डिजिटल तंत्र से जुड़ना राज्य की वाहन निगरानी व्यवस्था को और अधिक एकीकृत करने वाला अगला कदम माना जा सकता है।

