देहरादून ; 22.08.2026,
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीजी प्रथम वर्ष के एक जूनियर डॉक्टर ने दो सीनियरों पर कथित तौर पर मामूली बात को लेकर प्रताड़ित करने और धमकाने का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि मामला केवल गिलास से पानी पीने जैसी सामान्य बात से शुरू हुआ, लेकिन बाद में कथित तौर पर दबाव और धमकी तक पहुंच गया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कॉलेज में रैगिंग पर रोक लगाने के लिए एंटी-रैगिंग कमेटी समेत कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर एंटी-रैगिंग कमेटी और संबंधित नियम भी दर्ज हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं गंभीर आरोप
दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग को लेकर पिछले कुछ समय में कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जनवरी 2026 में एक जूनियर छात्र ने सीनियर छात्रों पर बेल्ट और चप्पलों से मारपीट, जबरन बाल कटवाने तथा अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाए थे। मामले की जांच एंटी-रैगिंग कमेटी ने की थी।
उस प्रकरण में कॉलेज की जांच के बाद नौ एमबीबीएस छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। दो छात्रों पर जुर्माना लगाने के साथ कक्षाओं से निलंबन और हॉस्टल से निष्कासन जैसी कार्रवाई हुई, जबकि अन्य छात्रों पर भी अनुशासनात्मक कदम उठाए गए।
अब पीजी डॉक्टर की शिकायत ने बढ़ाई चिंता
ताजा शिकायत में पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टर का आरोप है कि दो सीनियरों ने पानी पीने के तरीके को लेकर उसे निशाना बनाया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, एक सामान्य व्यवहार को लेकर उस पर दबाव बनाया गया और कथित तौर पर धमकाने का भी प्रयास हुआ।
मामला सामने आने के बाद सवाल यह है कि यदि संस्थान में एंटी-रैगिंग व्यवस्था सक्रिय है और पहले मामलों में कार्रवाई भी हो चुकी है, तो जूनियर डॉक्टरों को इस तरह की शिकायत करने की स्थिति क्यों बन रही है।
कमेटियों की मौजूदगी से ज्यादा जरूरी प्रभावी निगरानी
कॉलेज में एंटी-रैगिंग कमेटी के साथ अनुशासनात्मक समिति भी गठित है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इन समितियों में वरिष्ठ चिकित्सकों के अलावा पुलिस प्रशासन, अभिभावक और छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ताजा शिकायत की जांच कितनी निष्पक्षता और तेजी से होती है। केवल जांच शुरू करना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता; जूनियर डॉक्टरों और छात्रों को बिना डर अपनी बात रखने का माहौल देना भी संस्थान की जिम्मेदारी है।
दून मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान में रैगिंग का कोई भी आरोप केवल दो छात्रों के बीच का विवाद नहीं है। यह कैंपस के अनुशासन, वरिष्ठ-जूनियर संबंधों और संस्थागत निगरानी की प्रभावशीलता से जुड़ा मुद्दा है। ताजा शिकायत की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन बार-बार सामने आ रही शिकायतें इस व्यवस्था की जमीनी निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत जरूर दिखाती हैं।

