देहरादून ; 21 अगस्त 2026,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में इंडिया टुडे ग्रुप के बिजनेस टुडे की ओर से आयोजित BTIndia@100 कार्यक्रम में उत्तराखण्ड की औद्योगिक संभावनाओं और विकास की भावी दिशा को प्रमुखता से सामने रखा। ‘Uttarakhand: Powering India’s Industrial Growth’ विषय पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने देश के उद्योग जगत को उत्तराखण्ड में निवेश के लिए आमंत्रित किया और राज्य को उद्योग, रोजगार, पर्यटन तथा स्थानीय उद्यमिता के बीच बेहतर तालमेल कायम करने वाला प्रदेश बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने उत्तराखण्ड की निवेश संबंधी पहचान को नई गति दी। समिट में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास निवेश प्रस्तावों को केवल समझौता ज्ञापन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक परियोजनाओं में बदलने का रहा है। निवेशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 30 से अधिक नई नीतियां तैयार की गई हैं, जिससे उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने में मदद मिली है।
उन्होंने स्वीकार किया कि पर्वतीय भूगोल के कारण उत्तराखण्ड में बड़े औद्योगिक भूखंडों की उपलब्धता दूसरे राज्यों की तरह व्यापक नहीं है। इसके बावजूद हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि सरकार भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं और जरूरी प्रशासनिक सहयोग को भी प्राथमिकता दे रही है।
कनेक्टिविटी को बताया औद्योगिक विस्तार की अहम कड़ी
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की तेजी से मजबूत होती कनेक्टिविटी को निवेश आकर्षित करने की महत्वपूर्ण वजह बताया। उनके अनुसार दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच आवागमन पहले की तुलना में आसान और तेज हुआ है। देहरादून से देश के विभिन्न प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाओं की उपलब्धता भी राज्य के कारोबारी माहौल को मजबूती देती है।
उन्होंने पंतनगर को भी भविष्य के औद्योगिक और लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में रेखांकित किया। पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को उन्होंने कुमाऊं क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों, कृषि आधारित कारोबार और माल परिवहन के लिए उपयोगी बताया। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर पहले से ही राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं।
पर्वतीय जिलों में भी उद्योगों का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार केवल मैदानी जिलों तक सीमित रखना राज्य सरकार की नीति नहीं है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली में औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।
इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘एक जिला-दो उत्पाद’ जैसी योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इससे छोटे कारोबारियों, कारीगरों और पारंपरिक आर्थिक गतिविधियों को व्यापक बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर सरकार की भर्ती नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई। नकल और पेपर लीक से जुड़े मामलों में कठोर कार्रवाई की गई तथा नकल माफिया के खिलाफ अभियान चलाकर करीब 100 लोगों को जेल भेजे जाने की बात कही।
उन्होंने बताया कि राज्य गठन के बाद करीब दो दशकों में लगभग 16 हजार नियुक्तियां हुई थीं, जबकि पिछले पांच वर्षों के दौरान 34 हजार से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार यह आंकड़ा युवाओं को सरकारी क्षेत्र में अवसर उपलब्ध कराने की सरकार की कोशिश को दर्शाता है।
स्टार्टअप और स्वरोजगार के क्षेत्र में भी प्रदेश में बदलाव का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद संभालने के समय राज्य में करीब 700 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब लगभग 2,000 हो गई है। होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय कारोबार के जरिए युवा और महिलाएं रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला’ से युवाओं को कारोबार की जानकारी
मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला’ पहल को युवाओं और महिलाओं के लिए उपयोगी मंच बताया। इसके तहत कारोबार शुरू करने, उत्पाद विकसित करने, बाजार तक पहुंच बनाने, प्रशिक्षण लेने और ऋण से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 13 हजार से अधिक लोग प्रशिक्षण ले चुके हैं।
पलायन रोकने के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था पर फोकस
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के लिए पलायन की चुनौती को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य पहाड़ के संसाधनों और वहां की युवा शक्ति को स्थानीय विकास से जोड़ना है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से रिवर्स माइग्रेशन को भी गति मिलने का दावा उन्होंने किया। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
पर्यटन को रोजगार और निवेश से जोड़ने की कोशिश
धामी ने उत्तराखण्ड की धार्मिक और पर्यटन क्षमता को भी राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताया। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर बढ़ती आवाजाही का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे सीमावर्ती और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय कारोबार को लाभ मिल रहा है।
उन्होंने चारधाम यात्रा के पहले चरण में 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने तथा कांवड़ यात्रा में करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का आंकड़ा साझा किया। आदि कैलाश क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद पर्यटकों की बढ़ती रुचि को भी उन्होंने सीमांत क्षेत्रों के आर्थिक विकास से जोड़ा।
‘जेन-जी’ को बताया नए भारत की आकांक्षाओं वाली पीढ़ी
मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए जेन-जी को ‘इंडियन जनरेशन’ के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक और डिजिटल माध्यमों के कारण देश-दुनिया में हो रहे बदलावों से सीधे जुड़ी है। उसकी अपेक्षाएं और अवसर दोनों पहले से कहीं व्यापक हैं। ऐसे में सरकारों की भूमिका युवाओं की आकांक्षाओं को समझकर उन्हें नए दौर के अनुरूप अवसर देने की है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को उत्तराखण्ड में निवेश का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य अब अपनी अर्थव्यवस्था को केवल पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय उत्पाद, कनेक्टिविटी और स्वरोजगार को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की कोशिश एक ऐसे विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की है, जिसमें मैदानी क्षेत्रों के साथ पर्वतीय जिलों को भी आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिले। निवेश से पैदा होने वाले रोजगार, स्थानीय उद्यमों के विस्तार और बेहतर बुनियादी ढांचे का फायदा प्रदेश के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे—इसी सोच के साथ राज्य को देश की आर्थिक प्रगति में प्रभावी भागीदार बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

