देहरादून ; 21 अगस्त,
देहरादून। उत्तराखंड की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनके हुनर को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना नई संभावनाएं पैदा कर रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित इस पहल से जुड़ी मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू की जोड़ी ने राखी निर्माण को अपनी आमदनी का जरिया बनाते हुए स्थानीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है। घर से शुरू हुआ उनका छोटा प्रयास अब बड़े बाजार तक पहुंचने की राह पर है।
सास-बहू की इस जोड़ी ने पारंपरिक राखियों को नए रंग, डिजाइन और स्थानीय रचनात्मकता के साथ तैयार किया है। हाथों से तैयार इन राखियों में महिलाओं की मेहनत के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति और सादगी की झलक भी देखने को मिलती है। कारोबार के बढ़ने से परिवार की आय में सहयोग मिलने के साथ दोनों महिलाओं के आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है।
इस पहल की खास बात यह है कि उत्पाद तैयार करने से लेकर उनकी बिक्री तक महिलाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिल रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का हुनर केवल गांव तक सीमित न रहे और उन्हें बेहतर ग्राहक तथा उचित बाजार मिल सके।
मालदेवता की इस सास-बहू की जोड़ी की राखियों को अब देहरादून के प्रमुख मॉल और सचिवालय परिसर में लगने वाले स्टॉलों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाने की तैयारी है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को शहर के बड़े बाजार में पहचान मिलने की उम्मीद है। साथ ही, अन्य महिलाओं को भी अपने हुनर को कारोबार में बदलने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हुए उन्हें स्वरोजगार और बाजार से जोड़ना है। मालदेवता की यह कहानी इसी सोच का उदाहरण बनकर सामने आ रही है, जहां परिवार की दो पीढ़ियों ने साथ मिलकर पारंपरिक राखी बनाने के काम को छोटे व्यवसाय का रूप दिया है। यदि ऐसे उत्पादों को लगातार बाजार और प्रचार का मंच मिलता रहा तो ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान मिल सकती है।

