देहरादून ; 19.08.2026।
प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से इस बार खेल महाकुंभ का आयोजन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्राफी के तहत होने वाले इस आयोजन की रूपरेखा तैयार कर ली है। प्रतियोगिताओं का सिलसिला 1 सितंबर से शुरू होकर 30 अक्टूबर तक चलेगा। आयोजन का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
न्याय पंचायत से राज्य स्तर तक पहुंचेगा मुकाबला
खेल महाकुंभ की शुरुआत न्याय पंचायत स्तर से होगी। इसके बाद खिलाड़ियों को विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र और अंत में राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इस व्यवस्था से गांव और छोटे कस्बों के खिलाड़ियों को बिना बड़े शहरों का रुख किए प्रतियोगी मंच मिलने की उम्मीद है।
आयोजन में अलग-अलग आयु वर्गों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही बालिकाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी प्रतियोगिताओं की व्यवस्था की गई है। विभाग का जोर अधिक से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर है, ताकि स्थानीय स्तर पर खेलों का माहौल मजबूत हो सके।
1 से 10 सितंबर तक न्याय पंचायत स्तर की प्रतियोगिताएं
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन 1 से 10 सितंबर के बीच कराया जाएगा। यहां अंडर-14 और अंडर-19 आयु वर्ग के बालक-बालिकाएं विभिन्न स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे।
इन प्रतियोगिताओं में कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो और मुर्गा झपट जैसे खेलों को शामिल किया गया है। इन खेलों के जरिए स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों की क्षमता का आकलन किया जाएगा और बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आगे के चरणों में पहुंचने का मौका मिलेगा।
ग्रामीण खिलाड़ियों पर खास फोकस
खेल महाकुंभ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर मिलेगा। ऐसे कई युवा खिलाड़ी संसाधनों या पर्याप्त मंच के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते। प्रतियोगिताओं को चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाने से इन खिलाड़ियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग की निदेशक दीप्ति सिंह ने आयोजन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभागीय स्तर पर प्रतियोगिताओं के संचालन, प्रतिभागियों की भागीदारी और अगले चरणों के लिए खिलाड़ियों के चयन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
प्रतिभाओं को तराशने की दिशा में अहम पहल
खेल महाकुंभ को केवल प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। अलग-अलग स्तरों पर मुकाबले होने से खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी अनुभव मिलेगा और उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करने का अवसर भी मिलेगा।
अक्टूबर के अंत तक चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न चरणों से गुजरकर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। इससे प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को भविष्य में बड़े खेल मंचों तक पहुंचने के लिए एक मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

