18.08.2026 ; देहरादून।
देहरादून। उत्तराखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विस्तार को नई गति देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने नए उद्योगों के लिए औद्योगिक भूमि, जरूरी आधारभूत सुविधाएं और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जिलों में करीब चार हजार एकड़ औद्योगिक भूमि नए उद्यमों के लिए उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश में वर्तमान में संचालित करीब 96,410 एमएसएमई इकाइयों को उत्पादन और निर्यात से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर भी सरकार का विशेष जोर है। योजना के तहत उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ भूमि आवंटन, आधारभूत ढांचे और आवश्यक स्वीकृतियों को समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश का माहौल मजबूत होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
दो साल में एक लाख रोजगार और 50 हजार करोड़ निवेश का लक्ष्य
औद्योगिक विकास के अगले चरण में सरकार ने आने वाले दो वर्षों में एक लाख नए रोजगार पैदा करने और करीब 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें उत्तराखंड में उत्पादन के साथ रोजगार और निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं।
विशेष रूप से एरोमा, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और स्टार्टअप आधारित उद्योगों के लिए औद्योगिक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं में भूखंड आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, जबकि कुछ स्थानों पर नई औद्योगिक अवस्थापनाओं का निर्माण भी जारी है।
काशीपुर में एरोमा पार्क को मिल रहा विस्तार
काशीपुर में करीब 41 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किए जा रहे एरोमा पार्क में अब तक 36 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। यह परियोजना राज्य की एरोमा पार्क नीति के अनुरूप तैयार की गई है। पार्क के विकसित होने से एरोमा और उससे जुड़े उद्योगों को एक ही औद्योगिक परिसर में सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को क्लस्टर का सहारा
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए खुरपिया और पराग में करीब तीन हजार एकड़ क्षेत्र तथा काशीपुर में 133 एकड़ में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। काशीपुर के क्लस्टर में अब तक 34 भूखंड आवंटित हो चुके हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण के लिए राज्य में बेहतर औद्योगिक माहौल तैयार करना है।
सितारगंज प्लास्टिक पार्क में उत्पादन के साथ प्रशिक्षण की सुविधा
सितारगंज फेज-दो में करीब 40 एकड़ में विकसित प्लास्टिक पार्क में 46 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। यहां उद्योगों को केवल जमीन उपलब्ध कराने के बजाय उत्पादन से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। प्रस्तावित व्यवस्थाओं में सिपेट सेंटर, परीक्षण और प्रशिक्षण सुविधाएं, वेयरहाउस तथा प्लास्टिक वेस्ट रीसाइक्लिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
कम पूंजी वाले उद्यमियों के लिए फ्लैटेड फैक्ट्री
स्टार्टअप और छोटे उद्यमियों के सामने अक्सर जमीन और भवन की लागत बड़ी चुनौती बनती है। इसे देखते हुए हरिद्वार, पंतनगर और सेलाकुई में फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य कम पूंजी वाले उद्यमियों को तैयार औद्योगिक स्थान उपलब्ध कराना है।
हरिद्वार में बहुमंजिला फ्लैटेड फैक्ट्री भवन तैयार हो चुका है। इसमें करीब 40 से 60 उद्योगों को जगह मिलने की संभावना है। इस मॉडल से छोटे उद्यमियों को शुरुआती चरण में बड़े भूखंड और भवन निर्माण पर भारी खर्च करने से राहत मिल सकती है।
खानपुर में 80 एकड़ का नया इंडस्ट्रियल एस्टेट
हरिद्वार जिले के खानपुर में करीब 80 एकड़ भूमि पर नया इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित किया जा रहा है। परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। योजना के अनुसार यहां करीब 200 एमएसएमई इकाइयों को भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
औद्योगिक पार्कों से मजबूत होगी निवेश की कड़ी
राज्य सरकार का जोर अब केवल औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उद्योगों को जमीन मिलने के बाद बिजली, सड़क, पानी, परीक्षण, प्रशिक्षण, भंडारण और अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे नए निवेशकों के लिए उद्योग शुरू करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान बनाने का प्रयास है।
एमएसएमई मंत्री भरत सिंह चौधरी के अनुसार, उत्तराखंड में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सिडकुल अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत के हिसाब से विशेष औद्योगिक पार्क और आधुनिक औद्योगिक ढांचा तैयार कर रहा है। काशीपुर, सितारगंज, हरिद्वार, पंतनगर और सेलाकुई की परियोजनाओं का लक्ष्य नए उद्योगों को आकर्षित करने के साथ रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।
कुल मिलाकर, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता और क्षेत्रवार विशेष पार्कों के विकास से उत्तराखंड में एमएसएमई क्षेत्र को नया आधार मिलने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं और निवेशकों को आवश्यक अनुमतियां व सुविधाएं तेजी से मिलती हैं, तो अगले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक उत्पादन, रोजगार और निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

