देहरादून ; 17.08.2026।
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। गुरुवार को टनल के भीतर अचानक पानी और मलबा आने के बाद वहां काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते सुरंग का एक हिस्सा पानी और मलबे से भर गया और करीब 22 श्रमिक इसके अंदर फंस गए।
हादसे के बाद शुरू हुए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन इस घटना में अब तक 8 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। वहीं दो मजदूर अभी भी लापता हैं। सोमवार को भी बचाव दल सुरंग के भीतर दोनों श्रमिकों की तलाश में जुटे रहे।
पानी और मलबे के बीच मुश्किल बना रेस्क्यू
टनल के भीतर लगातार पानी आने की वजह से राहत और बचाव कार्य आसान नहीं है। सुरंग में जमा पानी और मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों को आगे बढ़ने में काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है। चमोली जिलाधिकारी गौरव कुमार के मुताबिक, पानी की लगातार आमद बचाव अभियान में बाधा पैदा कर रही है।
रेस्क्यू टीमें ऐसे हिस्सों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही हैं जहां लापता मजदूरों के मौजूद होने की संभावना है। सुरंग के भीतर परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के कारण हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता श्रमिकों तक पहुंचना और अभियान को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना है।
22 मजदूरों के फंसने के बाद शुरू हुआ था बड़ा अभियान
हादसे के समय टनल के अंदर करीब 22 मजदूर मौजूद थे। पानी और मलबा आने के बाद कई श्रमिक अंदर फंस गए। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियों को अभियान में लगाया गया।
रेस्क्यू के दौरान कई मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। घायल श्रमिकों का उपचार किया गया, जबकि गंभीर रूप से प्रभावित मजदूरों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर भी प्रशासन ने ध्यान दिया। शुरुआती घंटों में बचाव अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि टनल के भीतर पानी का स्तर और मलबा लगातार स्थिति को मुश्किल बना रहा था।
मुख्यमंत्री धामी ने लिया हादसे का संज्ञान
हादसे की जानकारी सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने चमोली पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अस्पताल में भर्ती घायल श्रमिकों से भी मुलाकात की।
धामी ने घायलों के उपचार की व्यवस्था की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों से रेस्क्यू अभियान की प्रगति पर लगातार अपडेट लिया। सरकार की ओर से हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री की ओर से रेस्क्यू अभियान को लगातार जारी रखने और लापता श्रमिकों की तलाश में सभी जरूरी संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। सरकार की प्राथमिकता फिलहाल सुरंग में फंसे दोनों मजदूरों को जल्द से जल्द तलाशना है।
अस्पताल में घायलों से मिले मुख्यमंत्री
हादसे के बाद मुख्यमंत्री धामी ने गोपेश्वर जिला अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों के इलाज और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि घायलों को जरूरत के अनुसार उपचार और अन्य सुविधाएं मिलती रहें।
इस दौरान सरकार की ओर से हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई। हादसे ने उन परिवारों को गहरा सदमा दिया है, जिनके अपने इस दुर्घटना में जान गंवा चुके हैं।
अब दो परिवारों को अपनों की वापसी का इंतजार
हादसे के कई दिन गुजरने के बाद भी दो मजदूरों का पता नहीं चल पाया है। यही वजह है कि रेस्क्यू अभियान से जुड़ी हर कोशिश अब उन दोनों श्रमिकों की तलाश पर केंद्रित है।
सुरंग के अंदर पानी और मलबे की स्थिति को देखते हुए बचाव दलों के लिए अभियान जोखिम भरा है, लेकिन टीमें लगातार संभावित स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक लापता मजदूरों की तलाश पूरी नहीं हो जाती, तब तक अभियान जारी रखा जाएगा।
हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी सतर्कता
पीपलकोटी की घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही सुरंग और जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा तैयारियों के महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में बारिश, भूस्खलन, पानी का रिसाव और पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां निर्माण कार्यों के लिए हमेशा चुनौती बनी रहती हैं।
ऐसे हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर आपातकालीन तैयारियों, मजदूरों की सुरक्षा और रेस्क्यू सिस्टम को लेकर समीक्षा की जरूरत महसूस होती है। फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान राहत और बचाव कार्य पूरा करने पर है, जबकि घटना के कारणों और परिस्थितियों को लेकर आगे की प्रक्रिया संबंधित स्तर पर की जाएगी।
रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी उम्मीदें
पीपलकोटी टनल हादसे में आठ मजदूरों की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया है, जबकि दो परिवार अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सुरंग के भीतर फंसे उनके परिजन सुरक्षित बाहर आएंगे।
सोमवार को भी बचाव टीमें पानी और मलबे के बीच सुरंग के अंदर लगातार तलाश करती रहीं। प्रशासन और राज्य सरकार की नजर पूरे अभियान पर बनी हुई है। अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि रेस्क्यू टीमों को जल्द सफलता मिले और लापता दोनों मजदूरों के बारे में कोई सकारात्मक जानकारी सामने आए।

