16 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट को आने वाले समय में और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। एयरपोर्ट पर हवाई यातायात प्रबंधन को मजबूत करने के लिए नया रडार स्थापित करने की तैयारी है। इसके साथ ही एयर स्पेस को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के अधिकारियों को अधिक संख्या में विमानों की आवाजाही संभालने में सुविधा मिलेगी।
एयरपोर्ट निदेशक भूपेश सीएच नेगी के अनुसार एयरपोर्ट पर जल्द ही कई महत्वपूर्ण विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। प्रस्तावित व्यवस्थाओं का मुख्य उद्देश्य बढ़ते हवाई यातायात के अनुरूप एयरपोर्ट की तकनीकी और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है। नई तकनीक और बेहतर निगरानी व्यवस्था लागू होने से विमानों की आवाजाही पर नजर रखने में एटीसी को अधिक मदद मिलेगी।
बढ़ते हवाई यातायात के लिए जरूरी है आधुनिक व्यवस्था
देहरादून एयरपोर्ट पर पिछले कुछ समय में उड़ानों और यात्रियों की गतिविधियों में लगातार विस्तार हुआ है। ऐसे में एयर ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए आधुनिक एटीसी प्रणाली की जरूरत बढ़ रही है। नया रडार और इससे जुड़ी तकनीकी व्यवस्था एयर स्पेस में विमानों की स्थिति की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।
एयरपोर्ट प्रबंधन का जोर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिससे मौजूदा एयर स्पेस का अधिक प्रभावी उपयोग हो सके। इससे विमानों के संचालन के दौरान एटीसी को बेहतर समन्वय करने में मदद मिलेगी और हवाई यातायात बढ़ने के बावजूद परिचालन को व्यवस्थित रखने में आसानी होगी।
एटीसी क्षमता मजबूत होने से कम हो सकती है परिचालन संबंधी दिक्कत
नई व्यवस्था का एक अहम फायदा यह होगा कि एटीसी अधिकारी एक समय में अधिक विमानों की आवाजाही को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकेंगे। इससे विमान के आने और रवाना होने के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है। एयर ट्रैफिक बढ़ने की स्थिति में भी उपलब्ध एयर स्पेस का अधिक वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
एयरपोर्ट पर आधुनिक तकनीकी सुविधाएं बढ़ाने की यह पहल भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की जा रही है। इससे देहरादून एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों को भी मिलेगा अप्रत्यक्ष लाभ
एटीसी और एयर स्पेस प्रबंधन में सुधार का सीधा असर यात्रियों की सुविधा पर भी पड़ सकता है। विमानों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होने से फ्लाइट संचालन में अनावश्यक देरी की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा बढ़ते हवाई यातायात को संभालने की क्षमता मजबूत होने से भविष्य में नई उड़ानों के संचालन के लिए भी बेहतर आधार तैयार होगा।
एयरपोर्ट निदेशक ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में एयरपोर्ट पर कई अन्य विकास कार्य भी किए जाएंगे। इससे जौलीग्रांट एयरपोर्ट को बढ़ते हवाई यातायात के अनुरूप तकनीकी रूप से और सक्षम बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
देहरादून एयरपोर्ट पर नई एटीसी व्यवस्था और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं को बढ़ाने की पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब उत्तराखंड में पर्यटन, तीर्थाटन और व्यावसायिक गतिविधियों के चलते हवाई कनेक्टिविटी की मांग लगातार बढ़ रही है।

