Dehradun। 15 August 2026 ;
देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लंबे समय से सेवाएं दे रहे 105 उपनल सफाई कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा मामला अब राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के स्तर तक पहुंच गया है। कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिलाने को लेकर आयोग ने कॉलेज प्रशासन को शासन में जारी प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों को उनके वेतन संबंधी अधिकार मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने शुक्रवार को निरंजनपुर स्थित आयोग कार्यालय में स्वास्थ्य निदेशालय और दून मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक की। बैठक में कर्मचारियों की सेवा अवधि, मौजूदा व्यवस्था और शासनादेश के तहत मिलने वाले लाभ को लेकर जानकारी ली गई।
वर्ष 2009 से अस्पताल में दे रहे सेवाएं
आयोग के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार ये 105 सफाई कर्मचारी वर्ष 2009 से उपनल के माध्यम से दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत हैं। लंबे समय से अस्पताल की सफाई व्यवस्था में जिम्मेदारी निभाने के बावजूद समान कार्य-समान वेतन का लाभ दिए जाने का मामला लंबित बताया गया है।
आयोग उपाध्यक्ष ने अधिकारियों से इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई और कर्मचारियों को शासनादेश के अनुरूप लाभ न मिलने के कारणों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी निर्धारित मानकों और नियमों के तहत लाभ के पात्र हैं तो उनके मामले को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
अधिकारियों से शासनादेश के अनुसार कार्रवाई के निर्देश
बैठक के दौरान मकवाना ने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए कि पात्र कर्मचारियों के मामले में शासनादेश और लागू नियमों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के अधिकार से जुड़े विषय को स्पष्ट प्रक्रिया के तहत निस्तारित किया जाना चाहिए।
इस बैठक में अपर स्वास्थ्य निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. रविंदर सिंह बिष्ट, संयुक्त निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. शेखर पाल और कॉलेज प्राचार्य की ओर से डॉ. विनम्र मित्तल मौजूद रहे। अधिकारियों ने आयोग के समक्ष मामले से संबंधित स्थिति की जानकारी रखी।
कर्मचारियों को मिल सकता है राहत का रास्ता
आयोग के हस्तक्षेप से अब 105 उपनल सफाई कर्मचारियों के मामले में आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि शासनादेश के अनुसार कर्मचारी समान कार्य-समान वेतन के लिए पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें इसका लाभ दिए जाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में सफाई व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण कार्य से जुड़े इन कर्मचारियों का मामला लंबे समय से लंबित रहने के कारण आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। अब कॉलेज प्रशासन द्वारा शासनादेश के प्रावधानों का परीक्षण कर की जाने वाली कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

