14 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। मंत्रों के संभावित चिकित्सकीय प्रभावों को शोध के माध्यम से परखने की दिशा में उत्तराखण्ड में पहल तेज होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम् और श्री महन्त इन्दिरेश अस्पताल की ओर से सचिवालय परिसर में विशेषज्ञों के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्र चिकित्सा को अनुसंधान के दायरे में लाने से पहले उससे जुड़े विभिन्न शास्त्रीय और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई।
बैठक में विद्वानों ने बताया कि मंत्र चिकित्सा के अध्ययन में केवल मंत्र का उल्लेख पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके सही उच्चारण, प्रयोग की प्रक्रिया, निर्धारित नियमों और संबंधित परंपरा को भी शोध का हिस्सा बनाना जरूरी है। मंत्र के इस्तेमाल से संभावित प्रभावों को लेकर उपलब्ध पूर्व साहित्य और संदर्भों को भी महत्वपूर्ण माना गया।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रंगील सिंह रैना तथा श्री महन्त इन्दिरेश चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने शोध के लिए पहले से उपलब्ध सामग्री के उपयोग पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि किसी रोग के संदर्भ में मंत्र चिकित्सा से जुड़े पुराने या प्रमाणिक अध्ययन उपलब्ध हैं, तो उनकी समीक्षा के आधार पर आगे दूसरे रोगों में भी इसके प्रयोग की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
बैठक में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने सभी संबंधित विद्वानों से उपलब्ध ग्रंथों, शोध संदर्भों और अन्य उपयोगी सामग्री को 10 दिनों के भीतर योजना के नोडल अधिकारी तक पहुंचाने का आग्रह किया। प्राप्त सामग्री के आधार पर अनुसंधान की दिशा और आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।
मंत्र चिकित्सा को लेकर हुई इस चर्चा में उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय समेत देश के विभिन्न संस्थानों से जुड़े संस्कृत विशेषज्ञों ने भाग लिया। श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से प्रो. रामानुज उपाध्याय, प्रो. सुन्दरनारायण झा और प्रो. रामराज उपाध्याय भी बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में डॉ. अविन पाल, चंद्र मोहन पयाल, प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार, संस्कृत शिक्षा निदेशक मंजू भारती, प्रो. बिन्दुमती द्विवेदी, डॉ. मीनाक्षी सिंह, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के डॉ. प्रदीप सेमवाल सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए। ऋषिकेश से डॉ. शान्ति प्रसाद मैठाणी और कमल डिमरी ने भी विचार रखे।
योजना के नोडल अधिकारी डॉ. रामभूषण विजल्वाण, शासन के संस्कृत शिक्षा अनुसचिव संजय कुमार और अनुभाग अधिकारी तरुण धंजीवाल समेत अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। अब विशेषज्ञों से मिलने वाली सामग्री के आधार पर मंत्र चिकित्सा से जुड़े प्रस्तावित अनुसंधान को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

