12 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सामने आ रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए निर्वाचन विभाग ने जनजागरूकता की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से ‘शंका-समाधान-संवाद’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से अधिकारियों और जागरूकता से जुड़ी टीमों को सीधे जनता के बीच पहुंचकर लोगों के सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी दी गई है।
एसआईआर के तहत प्रदेश में बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। करीब 19 लाख मतदाताओं के मामलों में नोटिस दिए जाने के बाद वर्तमान में सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान मतदाता सूची में नाम को लेकर लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं और चर्चाएं भी सामने आई हैं। निर्वाचन विभाग का प्रयास है कि आधिकारिक जानकारी लोगों तक सीधे पहुंचाई जाए, ताकि किसी अपुष्ट सूचना या भ्रम के कारण मतदाताओं में अनावश्यक चिंता न बढ़े।
‘शंका-समाधान-संवाद’ के तहत जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन से जुड़े कर्मचारी और स्वीप (SVEEP) की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाताओं से संवाद करेंगी। टीमों का फोकस ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ उन स्थानों पर भी रहेगा, जहां एसआईआर को लेकर लोगों के बीच अधिक सवाल सामने आ रहे हैं। अधिकारियों की ओर से प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाने के साथ पात्र मतदाताओं को अपने दस्तावेज और दावे-आपत्तियों से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी।
निर्वाचन विभाग के इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचना भी है। छात्रों को मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और एसआईआर जैसी निर्वाचन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके जरिए युवा वर्ग को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के साथ उन्हें सही सूचना अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
एसआईआर के दौरान सामने आ रही प्रमुख भ्रांतियों में मतदाता सूची से जबरन नाम हटाए जाने और जानबूझकर मतदान केंद्र बदलने जैसी बातें शामिल हैं। विभाग का मानना है कि ऐसी चर्चाओं का समाधान तथ्यों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को लोगों के बीच जाकर उनकी शंकाएं सुनने और प्रक्रिया से जुड़े वास्तविक प्रावधानों की जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है।
निर्वाचन विभाग की कोशिश है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि आम मतदाता भी इसे समझे और अपनी स्थिति को लेकर किसी तरह की असमंजस में न रहे। ‘शंका-समाधान-संवाद’ के जरिए जनता और निर्वाचन तंत्र के बीच सीधा संवाद स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि एसआईआर से जुड़ी गलतफहमियों को समय रहते दूर किया जा सके और मतदाता सूची को लेकर लोगों का भरोसा कायम रहे।

