12 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को नई शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की कवायद के बीच मान्यता की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। प्रदेश में करीब 452 मदरसों में से एक महीने से अधिक समय गुजरने के बाद अब तक केवल सात संस्थानों को शिक्षा विभाग और संबंधित प्राधिकरण से मान्यता मिल सकी है। यह संख्या कुल मदरसों की तुलना में करीब एक प्रतिशत ही है। वहीं, जांच के दौरान कुछ संस्थानों ने मान्यता प्रक्रिया में शामिल होने से असहमति भी जताई है।
इस स्थिति को लेकर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने चिंता जताते हुए कहा है कि मदरसों को निर्धारित व्यवस्था के तहत पंजीकरण कराना जरूरी है। उनके मुताबिक, कुछ संस्थानों का अब भी मान्यता प्रक्रिया से दूरी बनाए रखना बच्चों की शिक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है।
मदरसा बोर्ड की जगह बनाया गया शिक्षा प्राधिकरण
शादाब शम्स के अनुसार, प्रदेश सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की है। इसके पीछे उद्देश्य मदरसों में शिक्षा के स्तर को बेहतर करना और वहां पढ़ने वाले बच्चों को पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों से जोड़ना बताया गया है।
नई व्यवस्था के तहत मदरसों के पाठ्यक्रम में उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबंधित पाठ्यक्रम को शामिल किया जाना है। इसमें सामान्य विषयों की पढ़ाई के साथ धार्मिक शिक्षा को भी स्थान देने की व्यवस्था बताई गई है। इस बदलाव का मकसद विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा और रोजगार के लिए व्यापक शैक्षणिक आधार उपलब्ध कराना है।
जांच में सामने आई अलग-अलग स्थिति
मान्यता प्रक्रिया के तहत कराई गई जांच की रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में मदरसों की ओर से दी गई जानकारी के साथ उनकी मान्यता को लेकर स्थिति भी दर्ज की गई है। कुछ संस्थानों ने प्रक्रिया को अपनाने की सहमति जताई है, जबकि कुछ ने मान्यता लेने से इनकार किया है।
मान्यता लेने वाले मदरसों की संख्या कम होने के कारण अब बाकी संस्थानों पर विभाग और प्राधिकरण की निगाह है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि शेष मदरसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे आते हैं या नहीं।
समय सीमा के बाद कार्रवाई की चेतावनी
शादाब शम्स ने कहा है कि निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण नहीं कराने वाले मदरसों के संचालन को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे संस्थानों में पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें सामान्य स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था की जाएगी।
वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने मुस्लिम उलेमाओं से भी अपील की है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और मदरसों का पंजीकरण उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद तथा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार कराएं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का अंतिम उद्देश्य बच्चों को बेहतर और व्यापक शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए

