12 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में योजनाओं की मौजूदा स्थिति, वित्तीय प्रगति, निर्माणाधीन परियोजनाओं, जल गुणवत्ता और उनके संचालन एवं रख-रखाव से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि हर घर जल का लक्ष्य केवल कनेक्शन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण परिवारों को नियमित, पर्याप्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल मिल रहा है या नहीं, इसे भी प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पूरी हो चुकी पेयजल योजनाओं का मौके पर सत्यापन कराने के निर्देश दिए, ताकि कागजों में पूर्ण दिखाई जा रही योजनाओं की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो सके।
समीक्षा बैठक में सामने आया कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत कुल 16,555 योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,015 योजनाएं अभी निर्माण या प्रगति के चरण में हैं। राज्य स्तर पर मिशन की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत बताई गई।
ग्रामीण परिवारों तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाने की स्थिति पर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि राज्य के कुल 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से करीब 14.20 लाख परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा प्रदेश के 14,979 गांवों में से 9,796 गांवों में हर नल से जल पहुंचने का सत्यापन पूरा किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने शेष पात्र परिवारों को निर्धारित समय के भीतर नल कनेक्शन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्माणाधीन और लंबे समय से लंबित योजनाओं को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने को कहा गया।
सीएम धामी ने योजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की नियमित निगरानी करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक जिले के लिए लक्ष्य, समयसीमा और जिम्मेदारी पहले से निर्धारित होनी चाहिए। यदि किसी योजना में बेवजह देरी सामने आती है तो संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के पुनर्भरण और पारंपरिक जल स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में पेयजल संकट की स्थिति को कम किया जा सके।
बैठक में प्रत्येक जनपद में पेयजल योजनाओं से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना पूरी होने के बाद उसका संचालन और रख-रखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके लिए स्थायी और जिम्मेदार व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव रोहित मीणा, झरना कमठान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

