8 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों से जुड़े मुद्दों पर बड़े फैसलों की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में श्रमिकों, पशुपालकों, खिलाड़ियों और न्यायिक ढांचे से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 17 प्रस्ताव सामने रखे गए, जिनमें से 16 पर कैबिनेट ने अपनी सहमति जताई।
इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली को लागू करने का है। इसके जरिए संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के वेतन और सामाजिक हितों को अधिक व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है। नियमावली में महिला और पुरुष कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर भेदभाव खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया है। अब समान प्रकृति का काम करने वाले पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन का प्रावधान लागू होगा।
ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना भुगतान
नई मजदूरी व्यवस्था में श्रमिकों के भुगतान से जुड़े कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। निर्धारित समय से अधिक काम लेने पर ओवरटाइम के लिए सामान्य मजदूरी की तुलना में दोगुना भुगतान किए जाने की व्यवस्था होगी। इससे अतिरिक्त काम करने वाले कर्मचारियों को उनके श्रम का उचित आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा मजदूरी के भुगतान की समयसीमा भी तय की गई है। कर्मचारियों को हर महीने की सात तारीख तक डिजिटल माध्यम से वेतन भुगतान करने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और वेतन मिलने में होने वाली देरी को कम करना है।
मजदूरी संबंधी विवादों के समाधान पर भी जोर
मजदूरी या भुगतान से जुड़े विवादों में श्रमिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए दावों के निस्तारण की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रावधान भी नियमावली में किया गया है। इससे कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए शिकायत और दावा प्रस्तुत करने में अपेक्षाकृत सरल व्यवस्था मिल सकेगी।
गो-पालन योजना में अब सामान्य वर्ग भी शामिल
कैबिनेट ने पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने गो-पालन योजना का दायरा बढ़ाते हुए सामान्य वर्ग को भी इसमें शामिल करने को मंजूरी दी है। योजना के तहत अब केवल गाय पालन तक सीमित सहायता नहीं रहेगी, बल्कि सामान्य वर्ग के लोगों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा।
सरकार के इस कदम को ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और लोगों के लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर तैयार करने से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे छोटे पशुपालकों को पशुधन बढ़ाने और अपनी आय के स्रोत मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने की दिशा में आगे बढ़ा कदम
कैबिनेट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके लिए तराई केंद्रीय वन प्रभाग के लामाचौड़ क्षेत्र में 30 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। यह फैसला राज्य के न्यायिक ढांचे के विस्तार और हाईकोर्ट के लिए नए परिसर की संभावनाओं से जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है।
चुनावी साल में कई वर्गों पर सरकार का फोकस
कैबिनेट के फैसलों में एक ओर जहां श्रमिकों के वेतन और अधिकारों को लेकर नई व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर पशुपालन और ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहित करने के फैसले भी लिए गए हैं। खेल सुविधाओं के विकास और न्यायिक ढांचे के विस्तार से जुड़े निर्णय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।
कुल मिलाकर कैबिनेट के ताजा फैसलों में रोजगार, श्रमिक हित, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन, खेल और न्यायिक सुविधाओं जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को छूने की कोशिश दिखाई देती है। खास तौर पर मजदूरी संहिता के लागू होने से महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए समान काम पर समान वेतन का प्रावधान उत्तराखंड में श्रमिक अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में सामने आया है।

