8 august 2026 ; Dehradun।
चमोली। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत किए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर पहली ही बरसात में सवाल खड़े होने लगे हैं। बारिश के दौरान कई संवेदनशील स्थानों पर दोबारा भूधंसाव और भूस्खलन की स्थिति बनने से हाईवे सुधार के लिए किए गए इंतजामों की मजबूती पर चर्चा शुरू हो गई है। गौचर के निकट कमेड़ा और पीपलकोटी के पास बेलाकूची में नए सुरक्षा कार्यों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
कमेड़ा में हाईवे को भूस्खलन और भूधंसाव से बचाने के लिए करीब 120 मीटर लंबे प्रभावित हिस्से में एंकरिंग के साथ रिटेनिंग वॉल तैयार की जा रही थी। निर्माण कार्य अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ था कि बारिश के बीच जमीन ने फिर से खिसकना शुरू कर दिया। इसका असर नवनिर्मित सुरक्षा दीवार पर पड़ा और करीब 15 मीटर हिस्सा नीचे की ओर धंस गया। इससे निर्माण की मजबूती के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र के भूगर्भीय हालात को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
कमेड़ा क्षेत्र पहले से ही भूधंसाव के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। यहां लगातार जमीन में हलचल होने के कारण सड़क को स्थिर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से किए जा रहे सुरक्षा कार्यों के प्रभावित होने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्माण के दौरान स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों और जल निकासी जैसे पहलुओं का कितना ध्यान रखा गया।
इसी तरह पीपलकोटी के समीप बेलाकूची में हाईवे किनारे हाल में बनाई गई सुरक्षा दीवार पर भी बारिश के बाद कई स्थानों पर चौड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। दीवार में आई इन दरारों से निर्माण की टिकाऊ क्षमता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावित हिस्से का उपचार नहीं किया गया तो लगातार बारिश की स्थिति में समस्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल प्रभावित स्थानों पर यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल की ओर से जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। जहां सड़क और आसपास की जमीन प्रभावित हुई है, वहां मिट्टी का भरान कर रास्ते को सुचारु रखने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल यातायात संचालन में मददगार हो सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपचार की जरूरत होगी।
एनएचआईडीसीएल अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित दोनों क्षेत्रों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि भूधंसाव दोबारा सक्रिय होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और सुरक्षा दीवारों पर दबाव किस वजह से बढ़ा। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधार और स्थायी उपचार की कार्रवाई की जाएगी।
बरसात के दौरान बदरीनाथ हाईवे पर सामने आई यह स्थिति सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के लिए भी चुनौती बन गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश, पानी के दबाव और कमजोर भूगर्भीय संरचना के कारण निर्माण कार्यों की निगरानी और रखरखाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में कमेड़ा और बेलाकूची में हुए नुकसान के बाद अब यह देखना अहम होगा कि तकनीकी जांच में क्या कारण सामने आते हैं और प्रभावित सुरक्षा कार्यों को किस तरह मजबूत किया जाता है।

