6 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और उत्तराखंड के प्रमुख नेताओं के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, पिछली बार गंवाई गई सीटों पर विशेष फोकस करने और युवाओं, खासकर Gen Z मतदाताओं तक प्रभावी पहुंच बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में यह तय किया गया कि पिछले विधानसभा चुनाव में जिन 23 सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, वहां अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और सांसदों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इन नेताओं का दायित्व होगा कि वे संबंधित क्षेत्रों में लगातार प्रवास करें, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाएं और संगठन को मजबूत करते हुए चुनावी माहौल तैयार करें।
प्रदेश नेतृत्व के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा, सांसद अनिल बलूनी को बदरीनाथ तथा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को पिरान कलियर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अन्य हारी हुई सीटों के लिए भी अलग-अलग नेताओं की जवाबदेही तय की गई है ताकि प्रत्येक क्षेत्र में लगातार निगरानी और चुनावी तैयारी सुनिश्चित हो सके।
बैठक में युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी चर्चा हुई। विधानसभा क्षेत्रवार कार्यक्रम आयोजित करने, पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं तक पहुंच बनाने और डिजिटल माध्यमों के जरिए संवाद बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया गया। पार्टी का मानना है कि आगामी चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए उनकी अपेक्षाओं और मुद्दों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
संगठनात्मक स्तर पर पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी फिर से सक्रिय भूमिका में लाने का निर्णय लिया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी कार्यकर्ताओं और नए युवाओं के बीच बेहतर तालमेल चुनावी अभियान को अधिक प्रभावी बना सकता है।
बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया गया। नेताओं से कहा गया कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए, ताकि सरकार के कार्यों का लाभ राजनीतिक स्तर पर भी दिखाई दे सके।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले संगठन में किसी प्रकार की खेमेबाजी या आपसी मतभेद की स्थिति नहीं बननी चाहिए। सभी नेताओं और पदाधिकारियों को एकजुट होकर कार्य करने तथा जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, लाभार्थी सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों की गति बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं। ऐसे में भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को केवल संगठन तक सीमित न रखकर युवाओं, पुराने कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों को साथ जोड़ने की बहुस्तरीय योजना पर काम करती दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में पार्टी की यह रणनीति उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में कितना असर डालती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

