4 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बरस रहे बादलों ने पहाड़ की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज बारिश के कारण कई स्थानों पर पहाड़ दरकने लगे हैं, जिससे राज्य में 84 सड़कें बंद हो गई हैं। संपर्क मार्ग बाधित होने से कई गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है, जबकि यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति यमुनोत्री हाईवे की बनी हुई है, जहां लगातार गिर रहे मलबे के कारण यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रहा है।
उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी और अन्य पर्वतीय जिलों में बारिश के चलते जगह-जगह सड़कों पर मलबा और चट्टानें आ गई हैं। इससे कई ग्रामीण मार्ग बंद हो गए हैं और जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है। प्रशासन बंद रास्तों को खोलने के लिए मशीनों की मदद से लगातार काम कर रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में रुकावट पैदा कर रही है।
यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाला हाईवे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। कई संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ी से बार-बार मलबा गिरने के कारण मार्ग खोलने की कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं। सड़क साफ होने के कुछ समय बाद ही दोबारा भूस्खलन होने से हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवाजाही पर नजर बनाए हुए है।
लगातार बारिश का असर प्रदेश की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। अलकनंदा, भागीरथी, मंदाकिनी और यमुना समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। लोगों को बरसाती नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
चारधाम यात्रा भी मौसम की मार झेल रही है। मार्ग बाधित होने के कारण कई श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम अनुकूल होने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।
मौसम विभाग ने फिलहाल बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन, एसडीआरएफ, पुलिस और लोक निर्माण विभाग की टीमें पूरी तरह सतर्क हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम की चेतावनियों का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

