3 august 2026 ; Dehradun।
उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में सहकारिता विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के बाद जिला सहकारी बैंकों की 34 नई शाखाएं खोलने को मंजूरी दे दी है। अब इन शाखाओं के संचालन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। अनुमति मिलते ही इन शाखाओं में बैंकिंग सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
नई शाखाओं के शुरू होने के बाद राज्य में जिला सहकारी बैंकों की कुल शाखाओं की संख्या बढ़कर 349 हो जाएगी। इससे विशेष रूप से उन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलेगी, जहां अब तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच सीमित रही है। स्थानीय लोगों को खाते खोलने, ऋण लेने, बचत योजनाओं का लाभ उठाने और अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों तक आधुनिक और भरोसेमंद बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है। नई शाखाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण युवाओं को सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। उनका कहना है कि मजबूत सहकारी बैंकिंग व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विभागीय जानकारी के अनुसार नई शाखाएं खोलने के लिए कुल 41 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें से सभी प्रस्तावों की तकनीकी और प्रशासनिक जांच की गई। जांच के बाद 34 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई, जबकि सात प्रस्ताव आवश्यक मानकों को पूरा नहीं कर सके। इनमें हरिद्वार जिले के पांच प्रस्ताव भी शामिल हैं, जिन्हें आवश्यक संशोधन के बाद दोबारा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सहकारिता विभाग का मानना है कि नई शाखाओं के संचालन से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी बैंकिंग नेटवर्क पहले से अधिक मजबूत होगा। इससे सरकारी योजनाओं के लाभ का वितरण भी अधिक पारदर्शी और तेज़ी से हो सकेगा।

