3 august 2026 ; Dehradun।
उत्तराखंड का सरकारी डेटा सेंटर एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर चर्चा में है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इस बार ‘बहरूपिया वायरस’ के जरिए सरकारी नेटवर्क में घुसपैठ की कोशिश की गई है। जांच एजेंसियां इस हमले के पीछे चीन से जुड़े एक संगठित हैकर ग्रुप की संभावित भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि यह वायरस सिस्टम में प्रवेश करने के बाद खुद को सामान्य सिस्टम फाइल की तरह प्रदर्शित करता है। इसी वजह से इसे पहचानना आसान नहीं होता और सक्रिय होते ही यह संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करता है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार खाद्य आपूर्ति, जीएसटी और पर्यटन जैसे विभागों के डिजिटल रिकॉर्ड पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि इन विभागों में बड़ी संख्या में नागरिकों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी मौजूद रहती है। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि कोई डेटा चोरी हुआ है, लेकिन जांच एजेंसियां सभी संभावनाओं की जांच कर रही हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में उत्तराखंड के सरकारी सिस्टम पर माकोप रैनसमवेयर का हमला हुआ था, जिससे कई सेवाएं प्रभावित हुई थीं। उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन ताजा खतरे ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार घटना के समय डेटा सेंटर की फायरवॉल सक्रिय नहीं थी। साथ ही, पहले खरीदे गए कुछ साइबर सुरक्षा उपकरणों के प्रभावी उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारी फिलहाल मामले की विस्तृत जांच में जुटे हैं और आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

