31 july 2026 ; Dehradun!
भारत में करेंसी व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पॉलीमर (प्लास्टिक आधारित) करेंसी नोटों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि इन नोटों को एक साथ पूरे देश में जारी नहीं किया जाएगा। सबसे पहले सीमित स्तर पर फील्ड ट्रायल किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भारतीय परिस्थितियों में ये नोट कितने प्रभावी और टिकाऊ साबित होते हैं।
चुनिंदा शहरों में होगा परीक्षण
आरबीआई ट्रायल के लिए शहरों का चयन किसी लॉटरी या रैंडम प्रक्रिया से नहीं करता। ऐसे शहर चुने जाते हैं जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां एक-दूसरे से अलग हों। इसका उद्देश्य यह समझना है कि पॉलीमर नोट गर्मी, ठंड, नमी, बारिश और धूल जैसी विभिन्न परिस्थितियों में किस तरह प्रदर्शन करते हैं। अलग-अलग जलवायु वाले क्षेत्रों में परीक्षण से नोटों की वास्तविक उपयोग क्षमता का आकलन किया जा सकेगा।
200 करोड़ नोटों का होगा फील्ड ट्रायल
पायलट परियोजना के तहत कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। इनमें ₹10 मूल्य वर्ग के 100 करोड़ और ₹20 मूल्य वर्ग के 100 करोड़ नोट शामिल होंगे। इन नोटों की छपाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की जाएगी। परीक्षण के दौरान इन नोटों के घिसने, मुड़ने, गंदे होने और लंबे समय तक चलने की क्षमता पर विशेष नजर रखी जाएगी।
₹10 और ₹20 के नोटों को ही क्यों मिली प्राथमिकता?
कम मूल्य वाले नोट रोजमर्रा के लेन-देन में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाते हैं। यही कारण है कि ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं। बार-बार हाथ बदलने, नमी, पसीने और धूल के संपर्क में आने से इनकी गुणवत्ता तेजी से प्रभावित होती है। ऐसे में यदि पॉलीमर नोट इन परिस्थितियों में बेहतर साबित होते हैं, तो कम मूल्य वर्ग की करेंसी की लाइफ बढ़ाई जा सकती है।
कागजी नोट भी रहेंगे चलन में
पॉलीमर नोटों का परीक्षण शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद कर दिए जाएंगे। फिलहाल दोनों प्रकार की करेंसी समान रूप से वैध रहेगी। ट्रायल के नतीजों के आधार पर भविष्य में बड़े स्तर पर पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल पर फैसला लिया जाएगा।
फायदे के साथ कुछ चुनौतियां भी
विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक उपयोग में रह सकते हैं। इससे खराब नोटों को बदलने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि इनकी शुरुआती छपाई पर अधिक खर्च आने की संभावना है। इसके अलावा एटीएम, कैश सॉर्टिंग मशीन और अन्य करेंसी हैंडलिंग सिस्टम को भी नए नोटों के अनुरूप अपडेट करना पड़ सकता है। साथ ही, इनके पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत होगी।
क्या तय करेगा ट्रायल का भविष्य?
फील्ड ट्रायल के दौरान आरबीआई यह मूल्यांकन करेगा कि पॉलीमर नोट भारतीय मौसम, रोजमर्रा के उपयोग और लंबे समय तक चलने की कसौटी पर कितने सफल रहते हैं। यदि परीक्षण सकारात्मक रहता है, तो भविष्य में चरणबद्ध तरीके से इनके दायरे को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल यह पहल भारतीय करेंसी प्रणाली को अधिक टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग मानी जा रही है।

