30 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच कृषि क्षेत्र तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है। राज्य में किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की किसान केंद्रित योजनाओं, आर्थिक सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से पहाड़ी क्षेत्रों में खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि रोजगार और व्यवसाय का माध्यम भी बन रही है।
राज्य के कई हिस्सों में किसान पॉलीहाउस तकनीक, बागवानी, जैविक खेती और विभिन्न प्रकार की मिश्रित खेती को अपनाकर बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं। कम जमीन में अधिक पैदावार लेने के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे मौसम की चुनौतियों के बावजूद किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
पॉलीहाउस और बागवानी से बदली किसानों की तस्वीर
उत्तराखंड में पॉलीहाउस खेती किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आई है। इसके माध्यम से सब्जियों और अन्य फसलों का उत्पादन नियंत्रित वातावरण में किया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता बेहतर होने के साथ बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ी है।
इसके अलावा सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे अभियानों से पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी को नई गति मिली है। किसान पारंपरिक फसलों के साथ फल उत्पादन की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं।
जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा
उत्तराखंड की प्राकृतिक परिस्थितियां जैविक खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। राज्य में किसान रासायनिक खेती की जगह जैविक तरीकों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है और पहाड़ी क्षेत्रों के उत्पादों को अलग पहचान मिल रही है।
सरकार द्वारा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों से किसानों को अपने उत्पाद बेचने में सहायता मिल रही है। हिमालयी क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे प्रयास भी किए जा रहे हैं।
युवाओं के लिए खेती बन रही रोजगार का जरिया
आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से प्रदेश के युवा भी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई किसान अब उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन पर भी ध्यान दे रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और पलायन रोकने में भी मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसानों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार क्लस्टर आधारित खेती, बेहतर सिंचाई व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और कृषि योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उत्तराखंड में कृषि क्षेत्र में हो रहा यह बदलाव बताता है कि तकनीक, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत के मेल से पहाड़ी क्षेत्रों की खेती को नई दिशा दी जा सकती है।

