29 july 2026 ; Dehradun!
गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 के धार्मिक आयोजनों का विस्तृत कार्यक्रम घोषित किया। उन्होंने कहा कि इस बार अर्धकुंभ को सनातन परंपरा की गरिमा के अनुरूप दिव्य और भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। विशेष बात यह रहेगी कि अर्धकुंभ के इतिहास में पहली बार “अमृत स्नान” की परंपरा का आयोजन किया जाएगा।
माया देवी मंदिर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि जूना अखाड़ा ने अर्धकुंभ-2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कार्यक्रम के अनुसार 21 नवंबर 2026 को हरिप्रबोधिनी एकादशी के दिन गोधूलि लग्न में तपस्वियों का नगर प्रवेश होगा। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 को भैरव अष्टमी के अवसर पर छावनी का भूमि पूजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 23 दिसंबर 2026 को श्री दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर धर्मध्वजा स्थापना के साथ संन्यासी और नागा संन्यासियों की छावनी में रोट पूजन संपन्न होगा। वहीं 14 जनवरी 2027 को उत्तरायणी स्नान और सूर्योपासना के बाद पारंपरिक पेशवाई निकाली जाएगी।
अर्धकुंभ के प्रमुख आकर्षण के रूप में तीन अमृत स्नान निर्धारित किए गए हैं। पहला अमृत स्नान 6 मार्च 2027 को, दूसरा 8 मार्च 2027 को सोमवती अमावस्या के अवसर पर तथा तीसरा 14 अप्रैल 2027 को चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन होगा।
श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने विश्वास जताया कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए संत समाज पूरी तरह तैयार रहेगा और आयोजन आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न होगा।
उधर, राज्य सरकार भी अर्धकुंभ-2027 की तैयारियों में तेजी ला रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आयोजन को दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप दिया जाएगा। इसके लिए सड़क, घाट, पेयजल, विद्युत, सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है।

