29 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता विवरण में सामने आई विसंगतियों को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के करीब 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी कर निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अनुसार, एसआईआर के दौरान प्राप्त प्रपत्रों की जांच में कई मामलों में नाम, आयु, पारिवारिक संबंधों से जुड़ी जानकारी और अन्य विवरण रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं ताकि वे प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर सही जानकारी प्रस्तुत कर सकें।
नोटिस में प्रत्येक मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र की भाग संख्या, क्रम संख्या, पता तथा विसंगति का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। साथ ही सुनवाई की तारीख, समय और स्थान की जानकारी भी दी गई है, ताकि संबंधित व्यक्ति समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सके।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक दावे और दस्तावेज का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाएगा।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की संबंधित विभागों और संस्थानों से पुष्टि कराई जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई अभ्यर्थी शैक्षिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करता है तो उसका सत्यापन संबंधित शिक्षा बोर्ड से कराया जाएगा। यदि कोई प्रमाणपत्र या दस्तावेज फर्जी, मनगढ़ंत अथवा भ्रामक पाया जाता है, तो उसके आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने बताया कि गलत सूचना देने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-217 के तहत कार्रवाई संभव है। इस प्रावधान के अनुसार किसी लोक सेवक को जानबूझकर झूठी सूचना देकर किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष तक की कैद, 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। इस कानून के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधित कराने या हटाने के उद्देश्य से लिखित रूप में गलत घोषणा करना दंडनीय अपराध माना जाता है। दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
चुनाव आयोग ने सभी नोटिस प्राप्त मतदाताओं से अपील की है कि वे तय समय पर उपस्थित होकर सही और प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराएं, ताकि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाया जा सके तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

