27 july 2026 ; Dehradun
देहरादून। कभी अपनी अनोखी सुगंध और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में पहचान बनाने वाली देहरादून की पारंपरिक दून बासमती अब दोबारा खेतों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से इस वर्ष बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती के लिए आगे आए हैं। पिछले वर्ष मिले उत्साहजनक परिणामों के बाद इस बार इसकी खेती का दायरा बढ़ा दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत जिले के लगभग 160 किसान दून बासमती की रोपाई कर रहे हैं। बीते वर्ष सीमित स्तर पर किए गए प्रयोग के सफल रहने के बाद इस बार खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 75 हेक्टेयर कर दिया गया है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि दून बासमती को उसकी पारंपरिक पहचान दिलाने के लिए लगातार योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। पहले जहां इसकी खेती मुख्य रूप से सहसपुर और विकासनगर तक सीमित थी, वहीं अब रायपुर और डोईवाला क्षेत्र के किसान भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं।
प्रशासन का लक्ष्य दून बासमती को उसकी विशिष्ट खुशबू और गुणवत्ता के आधार पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, ताकि किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और आय बढ़ाने का अवसर मिल सके।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना (रीप) के तहत पिछले वर्ष किसानों से 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। इसकी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी गई। साथ ही, भविष्य में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और इस पारंपरिक धान की किस्म को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विकासनगर में जल्द ही सीड बैंक की स्थापना भी की जाएगी।

