24 july 2026 ; Dehradun
देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून की पहाड़ियों की तलहटी (फुटहिल) और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में कथित अवैध निर्माण को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों से एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया कि पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
यह मामला देहरादून निवासी रेनू पॉल द्वारा वर्ष 2021 में दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि शहर के फुटहिल क्षेत्रों, विशेष रूप से उन इलाकों में जहां भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है, बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि लगभग 30 डिग्री या उससे अधिक ढलान वाले संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवन और अन्य निर्माण खड़े किए गए हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होने के साथ-साथ भविष्य में आपदा का खतरा बढ़ सकता है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण को रोकने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने संबंधित विभागों से निर्माण कार्यों की वैधता, स्वीकृतियों और सुरक्षा मानकों के पालन से जुड़ी जानकारी भी प्रस्तुत करने को कहा है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनियंत्रित निर्माण के कारण पहाड़ियों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ढलान वाले क्षेत्रों में बिना वैज्ञानिक अध्ययन और उचित भू-तकनीकी जांच के निर्माण होने से भूस्खलन, मिट्टी के कटाव और वर्षा के दौरान हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
अब इस मामले में राज्य सरकार का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है। इस मामले पर पर्यावरण संरक्षण, शहरी विकास और आपदा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष नजर बनी हुई है।

