22 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। भानियावाला–ऋषिकेश फोरलेन परियोजना से जुड़े पेड़ों के कटान के मामले में पर्यावरण संरक्षण की मांग कर रहे लोगों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस मामले में दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने संकेत दिया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अवमानना की कार्रवाई का मामला नहीं बनता।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में है, क्योंकि प्रस्तावित फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान की आशंका जताई जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इससे क्षेत्र की हरित संपदा, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को लेकर विभिन्न स्तरों पर विरोध और कानूनी प्रयास किए गए।
दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि यह परियोजना देहरादून और ऋषिकेश के बीच यातायात को सुगम बनाने, बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और यात्रा को सुरक्षित एवं तेज़ बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सरकार का दावा है कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण के मानकों का भी पालन किया जाएगा।
इसी बीच, पर्यावरण प्रेमियों के बढ़ते विरोध को देखते हुए कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को पेड़ों के कटान की प्रक्रिया फिलहाल रोकने और पूरे मामले की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है तथा आवश्यक होने पर वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना याचिका खारिज किए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया का यह अध्याय भले समाप्त हो गया हो, लेकिन परियोजना को लेकर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन का मुद्दा अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों की नजर अब राज्य सरकार के अगले कदम और परियोजना से जुड़े निर्णयों पर बनी हुई है।

