19 july 2026 ; Dehradun!
भरतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस बार गढ़वाली सिनेमा ने इतिहास रच दिया। गढ़वाली फीचर फिल्म ‘ढोली‘ को रजत कमल (सिल्वर लोटस) सम्मान से नवाजा गया। यह उपलब्धि केवल एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भाषा और पहाड़ की कहानियों को राष्ट्रीय पहचान मिलने का प्रतीक मानी जा रही है।
‘ढोली’ ने अपनी संवेदनशील कहानी, सशक्त अभिनय और पहाड़ी जीवन के वास्तविक चित्रण के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म में उत्तराखंड के गांवों का जीवन, लोक परंपराएं, सामाजिक बदलाव और आम लोगों के संघर्ष को बेहद सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यही विशेषताएं इसे अन्य फिल्मों से अलग बनाती हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार की दौड़ में मजबूत दावेदार साबित हुईं।
गढ़वाली सिनेमा लंबे समय से सीमित संसाधनों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करता रहा है। बड़े बजट और व्यावसायिक फिल्मों के बीच क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों के लिए दर्शकों तक पहुंच बनाना आसान नहीं होता। ऐसे समय में ‘ढोली’ को मिला यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि अच्छी कहानी, ईमानदार प्रस्तुति और सांस्कृतिक जुड़ाव किसी भी भाषा की फिल्म को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकता है।
फिल्म की सफलता ने उत्तराखंड के कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी टीमों का मनोबल भी बढ़ाया है। राज्य के फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस सम्मान से युवा फिल्मकारों को अपनी मातृभाषा में सिनेमा बनाने की नई प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, गढ़वाली और अन्य उत्तराखंडी भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए निवेश, दर्शक और वितरण के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय फिल्मों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। अब दर्शक केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, लोकजीवन और वास्तविक कहानियों से जुड़ी फिल्मों को भी पसंद कर रहे हैं। ‘ढोली’ की उपलब्धि इसी बदलती सोच का उदाहरण है, जहां छोटे शहरों और पहाड़ों की कहानियां भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान हासिल कर रही हैं।
उत्तराखंड के सांस्कृतिक जगत में इस उपलब्धि को गर्व के क्षण के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर साहित्य और कला जगत तक फिल्म की सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि यह सम्मान आने वाले समय में गढ़वाली सिनेमा को नई दिशा देगा और प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, संगीत, बोली और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
‘ढोली’ को मिला रजत कमल सम्मान यह संदेश भी देता है कि सिनेमा की ताकत केवल बड़े सितारों या विशाल बजट में नहीं, बल्कि उन कहानियों में छिपी होती है जो समाज की जड़ों से जुड़ी हों। गढ़वाली सिनेमा के लिए यह उपलब्धि एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है, जिससे भविष्य में उत्तराखंड की कई और कहानियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती हैं।

