15 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस पर्व को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और लोक संस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण पर्व है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उत्तराखंड के लोक पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम हैं। हरेला हमें अपनी जड़ों, परंपराओं और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यह पर्व आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण के महत्व और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। ऐसे में राज्य के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए। मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों, नदियों, गाड़-गदेरों और वनों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि हरेला पर्व के अवसर पर अधिक से अधिक पौधारोपण करें और उनके संरक्षण का भी संकल्प लें। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। इससे पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि हरेला पर्व समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक मूल्यों को और अधिक सशक्त करेगा। साथ ही यह पर्व लोगों को अपनी लोक परंपराओं से जुड़े रहने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता रहेगा।

