15 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मदरसों की मान्यता प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जो मदरसे शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त नहीं करना चाहते, उन्हें संचालन बंद करने से पहले वहां पढ़ रहे सभी विद्यार्थियों का किसी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान में प्रवेश सुनिश्चित करना होगा। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी भी मदरसे को बंद करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
मान्यता के लिए तय मानकों का पालन होगा अनिवार्य
प्राधिकरण के अनुसार अब राज्य के सभी मदरसों को शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित आधारभूत और शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा। सबसे पहले विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से मान्यता प्राप्त करनी होगी, जिसके बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण धार्मिक शिक्षा संचालन की अनुमति देगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को भी बढ़ावा देना है।
आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और अन्य आधुनिक विषयों की शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य पेशों में आगे बढ़ सकें। इसी सोच के तहत शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की तैयारी की गई है।
पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षित शिक्षक होंगे जरूरी
नई व्यवस्था के तहत मदरसों के पास अपनी भूमि होना, प्रत्येक कक्षा के लिए निर्धारित आकार के कमरे, सभी आवश्यक विषयों के शिक्षक तथा बीएड और टीईटी योग्य शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसके अलावा पुस्तकालय की सुविधा भी जरूरी होगी। कक्षा 9 से 12 तक संचालित मदरसों में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं स्थापित करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा मिल सके।
कम छात्र संख्या वाले मदरसे भी चिंता का विषय
30 जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मदरसा बोर्ड के अधीन संचालित कक्षा 9 से 12 तक के 54 मदरसों में केवल 99 विद्यार्थी नामांकित पाए गए। इनमें 30 मदरसों में एक भी छात्र नहीं था, जबकि केवल नौ मदरसों में छात्र संख्या 10 से अधिक थी। शेष 15 मदरसों में 10 से भी कम विद्यार्थी अध्ययनरत मिले। ऐसे संस्थानों की शैक्षणिक उपयोगिता और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को लेकर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
छात्रों के हित को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने दोहराया है कि किसी भी मदरसे पर जबरन ताला नहीं लगाया जाएगा। यदि कोई संस्थान मान्यता लेने से इनकार करता है या संचालन बंद करना चाहता है, तो पहले वहां पढ़ रहे प्रत्येक विद्यार्थी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, सभी संस्थानों में समान शैक्षणिक मानक लागू करना और यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी छात्र बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के अवसरों से वंचित न रहे।

