12 july 2026!
देहरादून। भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर उठ रहे पर्यावरण और वन संरक्षण संबंधी सवालों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इस परियोजना के प्रत्येक चरण में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है तथा सभी कार्य वैधानिक स्वीकृतियों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किए जा रहे हैं।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक (पीआईयू) सौरभ सिंह ने बताया कि परियोजना की रूपरेखा तैयार करते समय वन क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े, इसके लिए विशेष सावधानी बरती गई। इसी उद्देश्य से वन क्षेत्र में सड़क के लिए निर्धारित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) को 60 मीटर से घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया, जिससे पेड़ों की कटाई और वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को काफी हद तक सीमित किया जा सके।
उन्होंने बताया कि वन्यजीवों, विशेष रूप से हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परियोजना में कई आधुनिक संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें एक ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार एलीफेंट अंडरपास, छह बॉक्स कल्वर्ट और 13 पाइप कल्वर्ट शामिल हैं। इसके अलावा सड़क किनारे ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक और नो-हार्न जोन जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं, ताकि वन्यजीवों और पर्यावरण पर सड़क यातायात का असर कम से कम हो।
परियोजना के तहत पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए प्रतिपूरक वनीकरण और उसके अगले 10 वर्षों तक रखरखाव के लिए 1.97 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई है। वहीं, वन्यजीव संरक्षण, राहत कार्यों तथा मिट्टी एवं जल संरक्षण योजनाओं के लिए 6.04 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि भी संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई गई है।
एनएचएआई के अनुसार राज्य सरकार ने प्रतिपूरक वनीकरण के लिए 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित कर दी है। परियोजना से प्रभावित कुल 4,369 पेड़ों में से 754 पेड़ों का वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से प्रत्यारोपण किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक हरित संपदा को संरक्षित रखा जा सके।
सौरभ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना में न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर पेड़ काटे जाने के आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दायर अवमानना याचिका को उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। उनके अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद ही शुरू किया गया है और वर्तमान में भी हर चरण में पर्यावरणीय शर्तों तथा न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

