11 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस उद्देश्य को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए चरणबद्ध और दीर्घकालिक विकास की रणनीति तय की गई। सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटन सुविधाएं बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नवीकरणीय ऊर्जा को एक साथ जोड़ते हुए एक ऐसा मॉडल तैयार करना है, जो भविष्य में उत्तराखंड के अन्य पर्यटन क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सके।
बैठक में टिहरी झील परियोजना के लिए एक आकर्षक और सरल नाम तय करने पर भी जोर दिया गया, ताकि यह परियोजना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बना सके। साथ ही परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए टीएचडीसी के प्रबंध निदेशक को उच्च स्तरीय समिति का विशेष आमंत्रित सदस्य तथा टिहरी के जिलाधिकारी को भी समिति में शामिल करने का निर्णय लिया गया, जिससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
सरकार ने परियोजना को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनाने पर विशेष फोकस किया है। इसी दिशा में झील क्षेत्र में प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को सौर ऊर्जा से संचालित करने की संभावनाओं का अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए सोलर प्लांट स्थापित करने की व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा, ताकि ऊर्जा की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन भी कम किया जा सके और टिहरी झील हरित विकास का उदाहरण बन सके।
पर्यटन को स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की योजना भी इस परियोजना का अहम हिस्सा होगी। झील के आसपास स्थित चयनित गांवों को उत्तराखंड की पारंपरिक कला, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन शैली की थीम पर विकसित कर ‘ट्रेडिशनल विलेज’ के रूप में तैयार किया जाएगा। इन गांवों में आने वाले पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव मिलेगा, वहीं ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार भविष्य में इस मॉडल को राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी लागू करने की तैयारी कर रही है।
जल पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को भी वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया जाएगा। टिहरी झील में बोटिंग, जेटी संचालन और अन्य एडवेंचर गतिविधियों की शुरुआत से पहले झील की वहन क्षमता का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। इसके आधार पर एक समग्र मास्टर प्लान तैयार होगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों का सुरक्षित और संतुलित संचालन सुनिश्चित किया जा सके तथा पर्यावरण पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
परियोजना के अंतर्गत विकसित होने वाली सभी परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव की दीर्घकालिक व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए ऐसी आय सृजन गतिविधियों को योजना में शामिल किया जाएगा, जिनके माध्यम से भविष्य में इन परिसंपत्तियों का संचालन आत्मनिर्भर तरीके से हो सके और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित हो।
टिहरी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को नई पहचान देने के लिए एक विशेष संग्रहालय विकसित करने की भी योजना बनाई गई है। इस संग्रहालय में पुरानी टिहरी के राजशाही इतिहास, लोक संस्कृति, लोक कला और क्षेत्र की समृद्ध विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही जलमग्न हो चुके पुराने टिहरी शहर का त्रि-आयामी (3डी) मॉडल भी तैयार किया जाएगा, ताकि पर्यटक उस ऐतिहासिक नगर की संरचना और इतिहास को करीब से समझ सकें।
राज्य सरकार का मानना है कि टिहरी झील परियोजना केवल पर्यटन विकास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का एकीकृत मॉडल बनेगी। यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो टिहरी झील आने वाले वर्षों में देश ही नहीं बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकती है।

