10 july 2026
देहरादून/बद्रीनाथ। बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के अचानक संपर्क से बाहर होने के बाद जांच और तेज कर दी गई है। निलंबन के बाद उन्हें जोशीमठ स्थित समिति कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने वहां उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। उनका मोबाइल फोन भी लगातार बंद बताया जा रहा है, जिससे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
निलंबन के बाद नहीं हुआ संपर्क
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ के अनुसार, प्रमोद नौटियाल से निलंबन के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारी को अवकाश की अनुमति भी नहीं दी गई थी, बावजूद इसके वह कार्यालय नहीं पहुंचे। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है।
चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ी हलचल
चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के सामने आने के बाद प्रमोद नौटियाल ने छुट्टी का आवेदन दिया था, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली। इसी बीच भैरव सेना की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रमोद नौटियाल के माध्यम से समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर भी चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। हालांकि, अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि तथ्यों के आधार पर ही जांच होनी चाहिए।
पुराने रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
मामले की जांच के दौरान समिति के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिछले 10 से 12 वर्षों के दौरान उपयोग किए गए करीब 20 से 25 लैपटॉप का स्पष्ट रिकॉर्ड स्टॉक रजिस्टर में नहीं मिला है। हालांकि, समिति का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच जारी है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय लेन-देन और संपर्कों की हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां प्रमोद नौटियाल की भूमिका के साथ-साथ उनके संपर्कों, पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेन-देन और जीवनशैली की भी पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जांच पूरी होने का इंतजार
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। प्रमोद नौटियाल की तलाश और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावे से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। तब तक प्रशासन और मंदिर समिति दोनों ने आधिकारिक जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील की है।

