9 july 2026 : Dehradun!
देहरादून। बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख के बाद शासन, पुलिस और संबंधित संस्थाओं की कार्रवाई में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद शासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इसके साथ ही बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) से जुड़े एक निजी सहायक (पीए) को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई यहीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि अगले ही दिन संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में मुकदमा भी दर्ज किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार मामले को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा केवल दान राशि के प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। समिति यह भी जांच करेगी कि कहीं व्यवस्था में ऐसी कोई खामी तो नहीं रही, जिसके कारण कथित अनियमितता संभव हुई। जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और मंदिरों में मिलने वाले दान का उपयोग पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर दोष सिद्ध होता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न संगठनों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि जांच की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद सरकार आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय करेगी। यह मामला केवल वित्तीय जवाबदेही का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास और धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

