4 july 2026.
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की मंजू नयाल ने खेल जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्होंने उज़्बेकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर कुराश खेल में भारत की पहली महिला 3-स्टार अंतरराष्ट्रीय रेफरी बनने का गौरव प्राप्त किया है।
अल्मोड़ा के हवालबाग विकासखंड स्थित सिलंगिया गांव की रहने वाली मंजू नयाल का सफर संघर्ष, समर्पण और निरंतर मेहनत की मिसाल माना जा रहा है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनके लंबे खेल और शैक्षिक अनुभव का परिणाम है।
मंजू का बचपन उत्तराखंड की पहाड़ी वादियों में बीता। शुरुआती शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद वह अपने पिता स्वर्गीय बचन सिंह नयाल के साथ दिल्ली आ गईं, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया। पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान जूडो और कुराश जैसे मार्शल आर्ट खेलों की ओर बढ़ा, जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय की।
पिछले 22 वर्षों से खेल शिक्षा और कुराश के क्षेत्र में सक्रिय मंजू नयाल ने लगातार अपनी क्षमता और विशेषज्ञता को निखारा है। वर्ष 2023 में उन्होंने बी-लाइसेंस कोच के साथ 1-स्टार अंतरराष्ट्रीय रेफरी की योग्यता हासिल की। इसके बाद 2025 में उन्हें 2-स्टार अंतरराष्ट्रीय रेफरी का दर्जा मिला और अब 2026 में उन्होंने 3-स्टार अंतरराष्ट्रीय रेफरी बनकर इतिहास रच दिया है।
उनकी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2024 में उन्होंने कजाकिस्तान में आयोजित नोमैड गेम्स और रूस के याकुत्स्क में हुए चिल्ड्रेन ऑफ एशिया गेम्स में रेफरी की भूमिका निभाई। इसके अलावा 2025 में बहरीन में आयोजित एशियन यूथ गेम्स में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2026 में उन्होंने उज़्बेकिस्तान और जापान में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी रेफरी के रूप में योगदान दिया।
मंजू नयाल न केवल रेफरी के रूप में बल्कि कोच और आयोजक के रूप में भी लंबे समय से खेल जगत से जुड़ी रही हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने चीनी ताइपे में भारतीय टीम के कोच के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा 2003 और 2010 में आयोजित एशियन और वर्ल्ड स्तर की कुराश चैंपियनशिप की आयोजन समिति का हिस्सा रहकर भी अपनी भूमिका निभाई।
वर्तमान में मंजू नयाल गाजियाबाद के एक स्कूल में कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एम.पी.एड., बी.पी.एड. और योग शिक्षा में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।

