4 july 2026,
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़कों पर मलबा आने और यातायात बाधित होने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्यभर के संवेदनशील क्षेत्रों में 771 आधुनिक मशीनों और उपकरणों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं सड़क बहाली का कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
लोनिवि के अनुसार इस बार मानसून से पहले ही उन स्थानों की पहचान कर ली गई है, जहां हर वर्ष भारी बारिश के कारण सबसे अधिक दिक्कतें सामने आती हैं। इन्हीं स्थानों पर पोकलेन मशीन, व्हील लोडर, चैन डोजर, टिपर, रोलर, जेनरेटर, वुड कटर और आधुनिक रोबोटिक उपकरणों को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। इन संसाधनों का उद्देश्य सड़कों से मलबा हटाने, यातायात को जल्द बहाल करने और राहत कार्यों में तेजी लाना है।
चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए रुद्रप्रयाग बेल्ट के नर्कोटा, कालीयासौर, सकनीधार, खुमेरा, काकड़गाड़ और बांसवाड़ा जैसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी के साथ भारी मशीनरी पहले से मौजूद है। इससे यात्रा मार्गों पर किसी भी अवरोध की स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी और श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी।
उत्तरकाशी जिले के धरासू, स्यानाचट्टी, क्वागड्डी और थौला क्षेत्रों में भी मशीनों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वहीं देहरादून और चकराता क्षेत्र के कालसी, त्यूणी, अटाल सहित आसपास के संवेदनशील इलाकों में पोकलेन मशीनों की तैनाती की गई है, ताकि पहाड़ी मार्गों पर मलबा हटाने का कार्य बिना देरी के शुरू किया जा सके।
सीमांत जिला पिथौरागढ़ के धारचूला, मुनस्यारी, तवाघाट और नारायण आश्रम क्षेत्रों में भी मशीनें पहले से तैयार रखी गई हैं। इसके अलावा टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे भूस्खलन संभावित जिलों में अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की गई है, जिससे लगातार बारिश के दौरान सड़क संपर्क बहाल रखने में मदद मिलेगी।
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि मानसून के पूरे सीजन में मशीनों के साथ तकनीकी टीमों और कर्मचारियों को भी 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का लक्ष्य है कि किसी भी सड़क पर मलबा आने या मार्ग बाधित होने की स्थिति में कम से कम समय में यातायात सामान्य किया जाए, ताकि आम जनता और यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

