3 july 2026,
हरिद्वार। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए हरिद्वार जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर मेगा आपदा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारी बारिश, अचानक बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाना रहा।
मॉक ड्रिल के दौरान हर की पौड़ी सहित चिन्हित स्थानों पर ऐसी परिस्थितियों का अभ्यास किया गया, जिनमें लोगों के फंसने, जलस्तर बढ़ने और तत्काल रेस्क्यू की जरूरत पड़ सकती है। विभिन्न विभागों की टीमों ने आपसी समन्वय के साथ बचाव अभियान चलाने, घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आपातकालीन संसाधनों के उपयोग का प्रदर्शन किया।
अभ्यास में आपदा प्रबंधन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग, जल पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद टीमों की तैयारियों का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में किसी प्रकार की देरी न हो।
हरिद्वार प्रशासन का कहना है कि उत्तराखंड में मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से गंगा नदी के घाटों और तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि मानसून के दौरान नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं, प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। प्रशासन का मानना है कि समय रहते की गई तैयारी और जनभागीदारी से संभावित आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

