3 july 2026, देहरादून :
उत्तरकाशी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), उत्तरकाशी को नया नेतृत्व मिल गया है। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल एसएस राजपुरोहित ने संस्थान के 17वें प्रधानाचार्य के रूप में गुरुवार को विधिवत पदभार ग्रहण किया। उनके कार्यभार संभालने के साथ ही संस्थान में प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने, सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
पदभार ग्रहण करने के बाद कर्नल राजपुरोहित ने कहा कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान देश का एक प्रतिष्ठित पर्वतारोहण प्रशिक्षण केंद्र है और इसकी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में संस्थान में प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। साथ ही युवाओं को साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के प्रति प्रेरित करने के लिए भी नई पहल की जाएगी।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संस्थान के पूर्व प्रधानाचार्य कर्नल अंशुमान भदौरिया स्वास्थ्य कारणों से अपना कार्यभार आगे नहीं संभाल सके। पिछले वर्ष एवरेस्ट अभियान से लौटते समय वह हाई एल्टीट्यूड स्ट्रोक का शिकार हो गए थे और लंबे समय से उपचाराधीन हैं। उनके स्थान पर अंतरिम व्यवस्था के तहत पहलगाम स्थित जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल हेमचंद्र सिंह को प्रभारी प्रधानाचार्य बनाया गया था। बाद में कार्यकाल पूरा होने और पूर्व प्रधानाचार्य के स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार न होने के कारण रक्षा मंत्रालय ने नए प्रधानाचार्य की नियुक्ति का निर्णय लिया।
कर्नल एसएस राजपुरोहित को पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग 24 वर्षों का व्यापक सैन्य अनुभव प्राप्त है। उन्होंने उच्च हिमालयी इलाकों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पर्वतीय युद्धकला, नेतृत्व तथा विशेष प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। वह पहले हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में प्रशिक्षक के रूप में भी अपनी विशेषज्ञता प्रदान कर चुके हैं।
उन्होंने माउंटेन वारफेयर, विंटर वारफेयर और माउंटेन एवं कोल्ड वेदर ऑपरेशंस जैसे विशेष सैन्य प्रशिक्षण उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ पूरे किए हैं। इसके अलावा वे तीन बार माचोई शिखर पर सफल आरोहण कर चुके हैं तथा माउंट भागीरथी द्वितीय और माउंट डी-41 अभियानों का भी हिस्सा रहे हैं। एक प्रशिक्षित स्काई डाइवर के रूप में भी उनके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं।
संस्थान से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नल राजपुरोहित के नेतृत्व में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान प्रशिक्षण, अनुसंधान, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उनके अनुभव और नेतृत्व से संस्थान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलने की उम्मीद की जा रही है।

