2 july 2026
देहरादून। उत्तराखंड के तीन प्रमुख ऊर्जा निगमों—उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) और पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल)—में लंबे समय से चल रही अंतरिम प्रबंध निदेशक व्यवस्था अब समाप्त होने की ओर है। राज्य सरकार ने इन निगमों में स्थायी प्रबंध निदेशकों की नियुक्ति की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। चयन समिति द्वारा साक्षात्कार संपन्न किए जाने के बाद अब प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष भेजे जा रहे हैं।
ऊर्जा विभाग के अनुसार चयन प्रक्रिया तय कार्यक्रम के तहत पूरी की गई। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेकर उनकी प्रशासनिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, प्रबंधन अनुभव और ऊर्जा क्षेत्र में कार्य का मूल्यांकन किया। अब समिति की संस्तुतियों पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलते ही तीनों निगमों में नए प्रबंध निदेशकों की औपचारिक नियुक्ति की जाएगी।
इस भर्ती प्रक्रिया के लिए कुल 18 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। दस्तावेजों की जांच के बाद 16 उम्मीदवार पात्र पाए गए, जबकि निर्धारित तिथि पर 14 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार में शामिल हुए। चयन समिति ने सभी उम्मीदवारों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
दरअसल, पिछले लंबे समय से इन निगमों में शीर्ष पदों पर अस्थायी व्यवस्थाओं के जरिए कामकाज संचालित हो रहा था। इससे कई महत्वपूर्ण योजनाओं और दीर्घकालिक निर्णयों पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती रही है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों और विशेषज्ञों का भी मानना रहा है कि स्थायी नेतृत्व मिलने से संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी होगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
उत्तराखंड जैसे जल विद्युत क्षमता वाले राज्य में ऊर्जा निगमों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बिजली उत्पादन, विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार, नई परियोजनाओं का संचालन और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार जैसे कई बड़े फैसले इन निगमों के माध्यम से ही लागू होते हैं। ऐसे में पूर्णकालिक प्रबंध निदेशकों की नियुक्ति से नीति निर्माण और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी नेतृत्व मिलने के बाद निगमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही विभागीय समन्वय और प्रशासनिक निर्णयों में भी स्पष्टता आएगी।
अब पूरी प्रक्रिया मुख्यमंत्री के अंतिम अनुमोदन पर निर्भर है। स्वीकृति मिलते ही तीनों ऊर्जा निगमों के नए प्रबंध निदेशकों के नामों की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। इसके साथ ही लंबे समय से चली आ रही अंतरिम व्यवस्था समाप्त होगी और उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र को स्थायी नेतृत्व मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

