25 june 2026,
3डी तकनीक से तैयार हुआ पूरे मार्ग का विस्तृत नक्शा
उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी केदारनाथ रोपवे परियोजना अब योजना के चरण से आगे बढ़कर क्रियान्वयन की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच प्रस्तावित रोपवे मार्ग का विस्तृत डिजिटल मॉडल तैयार कर लिया गया है। लिडार सर्वे, ड्रोन मैपिंग और हाई-रिजॉल्यूशन वीडियोग्राफी के जरिए पूरे पहाड़ी क्षेत्र को थ्री-डी स्वरूप में बदल दिया गया है, जिससे परियोजना के प्रत्येक हिस्से का सूक्ष्म अध्ययन संभव हो सका है।
पहाड़ों की मजबूती और जोखिम वाले क्षेत्रों का हुआ वैज्ञानिक परीक्षण
परियोजना के तहत विशेषज्ञों ने पहाड़ों की संरचना, ढलानों की स्थिति और संभावित भूस्खलन क्षेत्रों का गहन विश्लेषण किया है। जियो-टेक्निकल जांच के लिए विभिन्न स्थानों पर बोरहोल ड्रिलिंग कर मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र किए गए। इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच के बाद यह आकलन किया गया कि किस स्थान की जमीन कितने भार को सुरक्षित रूप से वहन कर सकती है और कहां मजबूत नींव की आवश्यकता होगी।
इस अध्ययन से रोपवे टावरों, स्टेशनों और अन्य संरचनाओं के लिए सबसे सुरक्षित स्थानों की पहचान करने में मदद मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक प्रक्रिया से भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं और भूगर्भीय जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
स्टेशन निर्माण के लिए सुरक्षित स्थानों की पहचान
सोनप्रयाग और गौरीकुंड में बनने वाले स्टेशनों के लिए टोपोग्राफी और जियो-टेक्निकल सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। आधुनिक जीपीएस सिस्टम, ड्रोन और अन्य सर्वे उपकरणों की सहायता से क्षेत्र की ऊंचाई, घाटियों, पहाड़ी ढलानों और भौगोलिक परिस्थितियों का विस्तृत डेटा तैयार किया गया। इसके आधार पर ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां निर्माण कार्य अपेक्षाकृत सुरक्षित और टिकाऊ रहेगा।
अंतिम अलाइनमेंट पर जारी है काम
परियोजना का प्रारंभिक अलाइनमेंट तैयार हो चुका है, जबकि अंतिम अलाइनमेंट को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत अध्ययन जारी है। अंतिम मार्ग तय होने के बाद निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर चरण का परीक्षण किया जा रहा है।
निर्माण सामग्री पहुंचाने की तैयारी भी पूरी
रोपवे निर्माण में उपयोग होने वाली भारी मशीनों और उपकरणों को पर्वतीय क्षेत्र तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए देहरादून से सोनप्रयाग तक वास्तविक आकार के कंटेनरों के साथ लॉजिस्टिक्स ड्राई रन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस अभ्यास के दौरान उन मार्गों और स्थानों की पहचान की गई जहां भारी वाहनों की आवाजाही में कठिनाई आ सकती है।
30 मिनट में पूरी होगी कठिन यात्रा
परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग पर कई घंटों की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जबकि रोपवे शुरू होने के बाद लगभग 13 किलोमीटर की दूरी महज 30 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य यात्रियों को विशेष राहत मिलेगी।
वन भूमि स्वीकृति प्रक्रिया पर भी तेज हुआ काम
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार वन भूमि स्वीकृति और अन्य आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर सभी औपचारिकताओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सके।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
केदारनाथ रोपवे परियोजना को केवल एक परिवहन सुविधा नहीं बल्कि धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके संचालन से यात्रा समय में कमी आएगी, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और चारधाम यात्रा को अधिक सुगम एवं सुरक्षित बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक अवसंरचना विकास का एक नया उदाहरण साबित हो सकती है।

