लखनऊ, 23 जून।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई परिवार अपने बच्चों और परिजनों को खोने के गम में डूबे हुए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने प्रशासनिक व्यवस्था और भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में बड़ा खुलासा: जिस इमारत में लगी आग, वह थी अवैध
हादसे के बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मंगलवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पता चला कि जिस भवन में कोचिंग सेंटर संचालित किया जा रहा था, वह मूल रूप से एक रिहायशी इमारत थी। नियमों के अनुसार इस भवन में शैक्षणिक संस्थान संचालित करने की अनुमति नहीं थी।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016 में इस निर्माण को अवैध मानते हुए इसे ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए थे। हालांकि, महज दो महीने बाद ही यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में आदेश वापस लिया गया और बाद में इस भवन में कोचिंग संचालन की अनुमति कैसे मिल गई।
फायर सेफ्टी के अभाव ने बढ़ाई त्रासदी
पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार भवन में अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध नहीं था। इतना ही नहीं, हादसे के समय छत की ओर जाने वाला दरवाजा भी बंद पाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और जांच अधिकारियों का कहना है कि आग फैलने के बाद कई लोग बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाए। धुएं के तेजी से फैलने के कारण अधिकांश लोगों की मौत दम घुटने से हुई।
एसी ब्लास्ट से शुरू हुई आग, सात घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह एयर कंडीशनर (एसी) में हुए विस्फोट को माना जा रहा है। सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे अचानक आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में धुआं पूरी इमारत में फैल गया।
घटना की सूचना मिलते ही SDRF, NDRF, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान करीब सात घंटे तक चला। कई स्थानों पर दीवारें तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना पड़ा। मलबे और धुएं के बीच राहतकर्मियों ने शवों और घायलों को बाहर निकाला।
बिल्डिंग मालिक गिरफ्तार, कई अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार
हादसे के बाद पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अब तक कुल चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जांच के दायरे में भवन को अनुमति देने वाले करीब 16 अधिकारी भी बताए जा रहे हैं, जिन पर आगे सख्त कार्रवाई हो सकती है।
एलडीए ने जारी किया नोटिस, बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अधिकारियों ने भवन मालिक को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
युवा सपनों का बुझ गया संसार
हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकांश छात्र-छात्राएं हैं, जिनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। मृतकों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और हरियाणा के छात्र भी शामिल हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आए इन युवाओं के सपने एक ही पल में खत्म हो गए।
डिप्टी सीएम का बयान: दोषियों को नहीं मिलेगी राहत
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि मामले में गिरफ्तारियां शुरू हो चुकी हैं और कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सवाल जो अभी भी जवाब मांग रहे हैं
- 2016 में अवैध घोषित भवन को संरक्षण किसने दिया?
- रिहायशी इमारत में कोचिंग सेंटर चलाने की अनुमति कैसे मिली?
- फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र के बिना संचालन क्यों जारी रहा?
- निरीक्षण करने वाले विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
लखनऊ अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की विफलता का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें SIT जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।

