19 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने हिमालयन कार रैली के आयोजन को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इस आयोजन से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय मार्गों और पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक पहचान मिलेगी। इसके साथ ही कैबिनेट ने पशुपालन, कृषि अनुसंधान और ग्रामीण विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की है।
पर्यटन उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, हिमालयन कार रैली में देश और विदेश के 120 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। यह आयोजन राज्य के विभिन्न पर्वतीय और पर्यटन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसाय, होटल उद्योग, परिवहन सेवाओं और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य इस रैली को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के रूप में स्थापित करना है। प्रस्तावित प्रतिभागियों में लगभग 25 विदेशी चालक, 25 एशियन क्रॉस-कंट्री रैली प्रतिभागी, 20 क्लासिक कार रैली प्रतिभागी और 50 राष्ट्रीय कार रैली चैंपियनशिप से जुड़े चालक शामिल हो सकते हैं। इससे राज्य में एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान मिलने की संभावना जताई जा रही है।
अनुभवी संस्था करेगी आयोजन
रैली के सफल संचालन और अंतरराष्ट्रीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अनुभवी संस्था के चयन को मंजूरी दी है। चयन प्रक्रिया विशेष प्रावधानों के तहत की जाएगी ताकि आयोजन में किसी प्रकार की तकनीकी या व्यवस्थागत कमी न रहे। सरकार का मानना है कि पेशेवर स्तर पर आयोजित यह रैली भविष्य में उत्तराखंड को मोटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना सकती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े खेल और साहसिक आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी लाभ मिलता है। रैली के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक, खिलाड़ी, तकनीकी दल और मीडिया प्रतिनिधि राज्य में पहुंचेंगे। इससे होटल, रेस्तरां, टैक्सी सेवा, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा राज्य के दूरस्थ पर्यटन स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू होगी भ्रूण प्रत्यारोपण योजना
कैबिनेट बैठक में पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का भी निर्णय लिया गया। राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली नस्ल के गो-वंशीय पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) तकनीक को पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जाएगा।
इस तकनीक के माध्यम से बेहतर आनुवांशिक गुणों वाले बछड़ों का उत्पादन किया जा सकेगा। पशुपालन विभाग का मानना है कि इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों व पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्तमान समय में बढ़ती दूध की मांग को देखते हुए यह योजना राज्य के डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कृषि अनुसंधान को भी मिलेगा बल
मंत्रिमंडल ने सगंध पौधा केंद्र में पांच विशेषज्ञ पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इससे औषधीय और सुगंधित पौधों पर अनुसंधान कार्य को गति मिलेगी। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में किसान औषधीय और सगंध पौधों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों की नियुक्ति से किसानों को नई तकनीक, बेहतर उत्पादन और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
विकास के कई क्षेत्रों पर सरकार का फोकस
हालिया कैबिनेट फैसले यह संकेत देते हैं कि राज्य सरकार पर्यटन, पशुपालन, कृषि और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों को समान रूप से मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। हिमालयन कार रैली जहां उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने का माध्यम बन सकती है, वहीं भ्रूण प्रत्यारोपण और अनुसंधान संबंधी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निवेश बढ़ेगा और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

