20 may 2026
उत्तराखंड की राजनीति के मजबूत स्तंभ और पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी अब पंचतत्व में विलीन हो गए। हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान और सैन्य परंपराओं के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी गई, वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो उठीं। सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पूरे वातावरण में शोक की भावना दिखाई दी।
बीसी खंडूरी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और सादगी की पहचान माने जाते थे। सेना में वर्षों तक देश सेवा करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उत्तराखंड के विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और प्रशासनिक पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि विरोधी दलों के नेता भी उनके व्यक्तित्व का सम्मान करते थे।
उनकी अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कई मंत्री, पूर्व जनप्रतिनिधि, सैन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए।मुख्यमंत्री धामी ने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति का प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि बीसी खंडूरी का जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित रहा। अंतिम यात्रा के दौरान “खंडूरी अमर रहें” के नारे भी सुनाई दिए, जिसने माहौल को भावुक बना दिया।
बीसी खंडूरी का राजनीतिक जीवन हमेशा साफ-सुथरी छवि के लिए याद किया जाएगा। वे दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने और सांसद के रूप में भी उन्होंने जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों के विकास और सड़क संपर्क सुधारने के लिए उनके प्रयासों को आज भी याद किया जाता है।
उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। राज्य के लोगों के लिए वे केवल नेता नहीं, बल्कि भरोसे और ईमानदारी का प्रतीक थे। अब जब वे पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं, तब उनकी सादगी, कार्यशैली और जनता के प्रति समर्पण हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।

