14 may 2026
देहरादून। उत्तराखंड में अभी एसआईआर की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन प्रदेशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। कई जगहों पर मस्जिदों और मदरसों में पोस्टर लगाकर लोगों से पुराने दस्तावेज और जमीन से जुड़े करीब 40 साल पुराने कागजात तैयार रखने की अपील की जा रही है।
इस बीच प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। माना जा रहा है कि सरकार अवैध कब्जों और संदिग्ध जमीन मामलों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही साफ कर चुके हैं कि उत्तराखंड में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक प्रशासनिक स्तर पर जमीन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच को लेकर हलचल बढ़ी हुई है। कई इलाकों में लोगों के बीच यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि अपने सभी पुराने दस्तावेज व्यवस्थित रखें।
धामी सरकार लगातार यह कहती रही है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना प्राथमिकता है। सरकार का रुख साफ माना जा रहा है कि यदि कोई निर्माण या कब्जा अवैध पाया गया तो कार्रवाई से छूट नहीं मिलेगी, फिर चाहे मामला किसी मस्जिद, मदरसे या अन्य संस्थान से जुड़ा क्यों न हो।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश में बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल प्रशासन की गतिविधियों और पोस्टरों की चर्चा ने राज्य का माहौल गरमा दिया है।

