14 मई 2026
दिल्ली से देहरादून तक का सफर आसान बनाने वाले बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर अब मुफ्त यात्रा की सुविधा समाप्त हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने शुक्रवार सुबह 8 बजे से इस एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी। अब इस मार्ग से गुजरने वाले सभी निजी और व्यावसायिक वाहनों को निर्धारित शुल्क देना होगा।
अब तक इस हाईवे के कई हिस्सों पर वाहन चालकों को बिना टोल के सफर करने की सुविधा मिल रही थी। लेकिन ट्रैफिक बढ़ने और संचालन व्यवस्था को नियमित करने के लिए प्रशासन ने टोल प्रणाली लागू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि टोल से मिलने वाली राशि हाईवे के रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य के विस्तार कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी।
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे को देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। करीब 210 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के जरिए दिल्ली से देहरादून पहुंचने का समय काफी कम हो गया है। पहले जहां यात्रियों को 6 से 7 घंटे तक का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी लगभग ढाई से तीन घंटे में पूरी की जा सकती है। इससे उत्तराखंड जाने वाले पर्यटकों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
हाईवे की खास बात यह है कि इसे आधुनिक तकनीक और पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मार्ग में कई अंडरपास, एलिवेटेड सेक्शन और वन्यजीव कॉरिडोर बनाए गए हैं ताकि जंगल क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो। इसके अलावा हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए बेहतर लेन व्यवस्था, इमरजेंसी सहायता और डिजिटल निगरानी प्रणाली भी लगाई गई है।
टोल वसूली के लिए FASTag को अनिवार्य किया गया है। जिन वाहनों पर FASTag नहीं होगा, उनसे दोगुना शुल्क लिया जा सकता है। शुरुआती जानकारी के अनुसार कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए अलग दरें तय की गई हैं, जबकि बस और ट्रकों को अधिक शुल्क देना होगा। टोल दरें दूरी और वाहन श्रेणी के हिसाब से निर्धारित की गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही पर्यटन, होटल कारोबार और स्थानीय व्यापार को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह हाईवे उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक और पर्यटन मार्गों में शामिल हो सकता है।

