देहरादून ; 30.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का दम दिखाया है। चीन के शंघाई में 22 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित 48वीं वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में प्रदेश के दो युवाओं ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक हासिल किए। उत्तरकाशी की सानिया जोशी ने रिटेल सेल्स और देहरादून के पार्थ वोहरा ने इंडस्ट्रियल डिजाइन टेक्नोलॉजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
दोनों युवाओं की इस उपलब्धि से उत्तराखंड में कौशल आधारित शिक्षा और प्रशिक्षण को लेकर नई उम्मीद जगी है। पहाड़ी राज्य के इन प्रतिभाशाली युवाओं ने दुनिया के विभिन्न देशों से पहुंचे प्रतिभागियों के बीच अपनी दक्षता का प्रदर्शन कर यह साबित किया कि सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।
64 कौशल विधाओं में हुआ अंतरराष्ट्रीय मुकाबला
वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता को वैश्विक स्तर पर तकनीकी एवं व्यावसायिक दक्षता की बड़ी प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। इस बार प्रतियोगिता में करीब 1,400 प्रतिभागियों ने 64 अलग-अलग कौशल विधाओं में हिस्सा लिया। विभिन्न देशों के प्रतिभागियों के बीच हुए मुकाबलों में भारत ने भी प्रभावी प्रदर्शन दर्ज किया।
भारत को प्रतियोगिता में 8 रजत पदक और 20 मेडलियन्स फॉर एक्सीलेंस हासिल हुए। इसके साथ भारत ने विश्व स्तर पर 10वां स्थान प्राप्त किया। इसे प्रतियोगिता में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया गया है।
राज्य स्तर से विश्व मंच तक पहुंची दोनों की कहानी
सानिया जोशी और पार्थ वोहरा की सफलता एक लंबी तैयारी और लगातार बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है। दोनों ने इंडिया स्किल्स के राज्य स्तरीय मुकाबलों में अपनी प्रतिभा दिखाई। इसके बाद क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका प्रदर्शन मजबूत रहा। इसी प्रदर्शन के आधार पर दोनों का चयन वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता के लिए हुआ।
सानिया ने रिटेल सेल्स के क्षेत्र में और पार्थ ने इंडस्ट्रियल डिजाइन टेक्नोलॉजी में अपने कौशल को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परखा और अंततः रजत पदक हासिल करने में कामयाब रहे।
प्रशिक्षण से लेकर विदेश यात्रा तक मिला सहयोग
दोनों प्रतिभागियों की अंतरराष्ट्रीय तैयारी में उत्तराखंड के कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग और उत्तराखंड कौशल विकास समिति ने सहयोग किया। प्रतियोगिता से पहले प्रतिभागियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और बूट-कैंप आयोजित किए गए। इसके अलावा यात्रा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में भी विभाग की ओर से सहायता उपलब्ध कराई गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए दोनों युवाओं को तैयार करने में नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) का भी सहयोग मिला। प्रशिक्षण और अभ्यास के जरिए प्रतिभागियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी तकनीकी दक्षता को निखारने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री धामी ने उपलब्धि को बताया गौरव का विषय
सानिया जोशी और पार्थ वोहरा की सफलता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों युवाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्व के प्रतिष्ठित कौशल मंच पर उत्तराखंड के युवाओं का देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक हासिल करना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी उपलब्धियां प्रदेश के दूसरे युवाओं को भी कौशल विकास, तकनीकी दक्षता और उत्कृष्ट प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।
कौशल मंत्री ने भी दी शुभकामनाएं
प्रदेश के कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी दोनों पदक विजेताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उत्तराखंड कौशल विकास समिति के परियोजना निदेशक नरेन्द्र सिंह भंडारी ने बताया कि वर्ल्ड स्किल्स को कौशल के क्षेत्र में ओलंपिक जैसी प्रतिष्ठा वाला वैश्विक मंच माना जाता है।
सानिया और पार्थ की उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब युवाओं के लिए पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल को रोजगार और करियर की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों युवाओं की सफलता उत्तराखंड में कौशल प्रशिक्षण ले रहे युवाओं के लिए एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

