देहरादून ; 15.10.2026,
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का इस वर्ष का तीसरा सत्र 27 अक्टूबर से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में शुरू होगा। दो दिवसीय सत्र 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। लोकभवन से मंजूरी मिलने के बाद सत्र की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। सत्र के दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट पेश कर सकती है। इसके साथ ही जनहित और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना है।
अनुपूरक बजट पर रहेगा विशेष जोर
विधानसभा के आगामी सत्र में सरकार का प्रमुख एजेंडा अनुपूरक बजट रहने वाला है। विभिन्न विभागों से विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और अन्य आवश्यकताओं के लिए मिले प्रस्तावों की वित्त विभाग समीक्षा कर रहा है। विभागीय जरूरतों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए बजट का अंतिम स्वरूप तैयार किया जा रहा है।
अनुपूरक बजट के माध्यम से उन योजनाओं और कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाती है, जिनके लिए मूल बजट में निर्धारित राशि पर्याप्त नहीं होती या बाद में अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकता सामने आती है। ऐसे में इस बजट से प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं और प्राथमिकता वाले कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
पांच हजार करोड़ से अधिक हो सकता है बजट का आकार
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने 5,315 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया था। इस बार भी अनुपूरक बजट का आकार पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, अंतिम राशि का पता बजट को अंतिम रूप दिए जाने और सदन में प्रस्तुत किए जाने के बाद ही चलेगा।
वित्त विभाग सभी विभागों से प्राप्त प्रस्तावों का आकलन कर रहा है, ताकि जरूरत के मुताबिक धनराशि का प्रावधान किया जा सके। सरकार के सामने विकास योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था करने के साथ-साथ उपलब्ध बजट का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने की चुनौती भी रहेगी।
खर्च नहीं हुई धनराशि का होगा पुनर्विनियोजन
सरकार की वित्तीय रणनीति में राजस्व प्रबंधन और बजट के प्रभावी उपयोग को प्राथमिकता दिए जाने के संकेत हैं। जिन विभागों की ओर से स्वीकृत बजट का पूरा उपयोग नहीं किया जा सका है, वहां बची हुई राशि की समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार इस धनराशि को दूसरे विभागों की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी धन को उन क्षेत्रों तक पहुंचाना है, जहां विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। इससे योजनाओं की प्रगति में तेजी लाने और बजट के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
कैबिनेट के फैसले के बाद तय हुआ सत्र का कार्यक्रम
विधानसभा सत्र की तारीख और स्थान को लेकर हाल ही में हरिद्वार में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा हुई थी। बैठक में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सत्र बुलाने पर सहमति बनी थी। मंत्रिमंडल के कई सदस्यों ने सत्र का आयोजन गैरसैंण में किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बाद सत्र की अवधि और स्थान निर्धारित करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री को सौंपी गई।
मुख्यमंत्री की सहमति मिलने पर 27 और 28 अक्टूबर को भराड़ीसैंण में सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव लोकभवन भेजा गया। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी। अब सत्र की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
विधानसभा सचिवालय तैयारियों में जुटा
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा है कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने के लिए सचिवालय पूरी तरह तैयार है। सत्र के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। दो दिन के इस सत्र में सरकार की ओर से बजट और विधायी कार्यों से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाया जाएगा।
गैरसैंण में सत्र का आयोजन राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार अनुपूरक बजट में किन विभागों और योजनाओं को प्राथमिकता देती है तथा सदन में किन महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को पेश किया जाता है।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, विभिन्न विभागों से मिले प्रस्तावों की जांच की जा रही है और अनुपूरक बजट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। बजट पेश होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों, विभागीय जरूरतों और वित्तीय प्रबंधन के बीच किस प्रकार संतुलन बनाने की तैयारी की है।

