देहरादून ; 23.09.2026।
देहरादून। पहाड़ों की वादियां, बर्फ से ढकी चोटियां, नदियां और प्राकृतिक नजारे लंबे समय से उत्तराखण्ड को फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते रहे हैं। अब राज्य की यही प्राकृतिक संपदा फिल्म शूटिंग के साथ-साथ प्रदेश में फिल्म आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी गति दे रही है। नई फिल्म नीति लागू होने के बाद उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण का दायरा तेजी से बढ़ा है और इसका असर राज्य में हुए कारोबार के आंकड़ों में भी नजर आ रहा है। पिछले पांच साल से कम अवधि में फिल्म शूटिंग से जुड़ी गतिविधियों के जरिए प्रदेश में 1,759 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार उत्तराखण्ड की भौगोलिक विविधता और प्राकृतिक वातावरण फिल्मांकन के लिहाज से काफी अनुकूल हैं। सरकार का फोकस अब केवल फिल्मों की शूटिंग को राज्य तक लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि फिल्म निर्माण से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने पर है। इसके जरिए स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, युवाओं और विभिन्न सेवा क्षेत्रों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
शूटिंग की अनुमति से लेकर पोस्ट-प्रोडक्शन तक सुविधाओं का विस्तार
उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए लागू फिल्म नीति-2024 को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नीति के तहत फिल्म निर्माताओं के लिए अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा पात्र फिल्मों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन और अनुदान, फिल्म पुरस्कार, प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति तथा पोस्ट-प्रोडक्शन से जुड़ी सुविधाओं को भी नीति में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड को केवल खूबसूरत शूटिंग लोकेशन के रूप में स्थापित करना नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण की जरूरतों को पूरा करने वाला व्यापक केंद्र तैयार करना है।
पांच वर्षों में 52 फिल्मों को मिला सरकारी अनुदान
राज्य सरकार की ओर से फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों को भी आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 52 फिल्मों को अनुदान प्रदान किया गया। इनमें हिंदी फिल्मों के साथ-साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और उत्तराखण्ड की अन्य भाषाओं में तैयार की गई फिल्में भी शामिल हैं।
सिर्फ 2025-26 में 25 फिल्मों को अनुदान दिया गया। इससे स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय संस्कृति पर आधारित सिनेमा को भी संस्थागत समर्थन मिलने की दिशा मजबूत हुई है।
1,440 से अधिक फिल्मों की शूटिंग और एनओसी गतिविधियां
उत्तराखण्ड में फिल्म गतिविधियों के विस्तार का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2019-20 से 2025-26 के बीच 1,440 से अधिक फिल्मों की शूटिंग और एनओसी से संबंधित गतिविधियां दर्ज की गई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक राज्य के अलग-अलग हिस्से फिल्म निर्माताओं को विविध लोकेशन उपलब्ध करा रहे हैं।
फिल्मों और शूटिंग से जुड़े लोगों की आवाजाही का लाभ होटल, परिवहन, खानपान, स्थानीय गाइड, तकनीकी सेवाओं, उपकरण उपलब्ध कराने वाले कारोबार और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी मिल रहा है। इस तरह फिल्म उद्योग राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ कई सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है।
पहली बार फिल्म पुरस्कारों के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को मंच
उत्तराखण्ड में फिल्म संस्कृति को मजबूत करने के लिए उत्तराखण्ड फिल्म पुरस्कार-2024 और 2025 का आयोजन भी किया जा रहा है। इन पुरस्कारों के जरिए प्रदेश में निर्मित या फिल्मांकित फिल्मों के अलावा स्थानीय बोलियों और भारतीय भाषाओं की फिल्मों को पहचान देने की योजना है।
कलाकारों के साथ-साथ लेखकों, निर्देशकों, तकनीशियनों और सिनेमा से जुड़े दूसरे रचनात्मक लोगों को भी सम्मानित किया जाएगा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने और प्रदेश में फिल्म से जुड़े पेशेवर माहौल को मजबूत करने की उम्मीद है।
शूटिंग लोकेशन से आगे बढ़ रहा उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड की फिल्म नीति में हो रहा बदलाव राज्य की भूमिका को केवल शूटिंग स्थल से आगे ले जाने की कोशिश को दर्शाता है। सरकार की योजनाओं में स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण और अवसर देने के साथ फिल्म निर्माण की तकनीकी जरूरतों को राज्य के भीतर विकसित करने पर भी जोर है।
प्राकृतिक खूबसूरती के साथ नीतिगत प्रोत्साहन और सुविधाओं का मेल उत्तराखण्ड को फिल्म निर्माताओं के लिए एक संगठित शूटिंग एवं प्रोडक्शन डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने की दिशा में ले जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर फिल्म-अनुकूल राज्य के रूप में बनी पहचान के बीच अब चुनौती इस माहौल को स्थायी फिल्म इकोसिस्टम में बदलने की है, ताकि शूटिंग से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक मिलता रहे।

