देहरादून ; 23.09.2026।
हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने गुरुकुलम् की स्थापना को भारतीय आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की पहचान केवल अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति से ही नहीं, बल्कि उस समृद्ध ज्ञान परंपरा से भी रही है, जिसने सदियों से मानव जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने की दिशा दिखाई है। आयुर्वेद इसी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और शरीर एवं मन के समन्वय पर आधारित व्यापक दृष्टिकोण है।
धामी ने कहा कि बदलते समय के साथ पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना जरूरी है। पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् इसी दिशा में शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सा के विभिन्न आयामों को एक साथ लाने का माध्यम बन सकता है। यहां आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं और प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन के साथ आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप शोध को भी बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में स्वस्थ जीवनशैली, प्राकृतिक चिकित्सा, योग और वेलनेस को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत के पास अपनी प्राचीन चिकित्सा एवं जीवन पद्धतियों के रूप में समृद्ध ज्ञान मौजूद है। आवश्यकता इस बात की है कि इस ज्ञान को प्रमाण आधारित अध्ययन, आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से और अधिक व्यवस्थित रूप दिया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग और आयुर्वेद सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को देश और दुनिया में नई पहचान मिली है। योग को वैश्विक स्तर पर मिली स्वीकार्यता के साथ आयुर्वेद के प्रति भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुचि बढ़ी है। उत्तराखंड इस क्षेत्र में अपनी भौगोलिक, प्राकृतिक और आध्यात्मिक विशेषताओं के कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड को योग और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा से जुड़ी भूमि बताते हुए कहा कि राज्य स्वास्थ्य एवं वेलनेस के क्षेत्र में नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हिमालय की प्राकृतिक संपदा, औषधीय वनस्पतियां, योग की परंपरा और राज्य की आध्यात्मिक विरासत उत्तराखंड को इस क्षेत्र में विशिष्ट पहचान देती हैं। इन संसाधनों का वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से उपयोग कर राज्य को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य एवं वेलनेस के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुकुलम् जैसी संस्थाएं केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे ज्ञान और संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने का भी काम करती हैं। आयुर्वेद की शिक्षा को आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के साथ जोड़ने से विद्यार्थियों के लिए अध्ययन और शोध के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। इससे प्राचीन भारतीय चिकित्सा ज्ञान को समझने, संरक्षित करने और वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों की विशेषता उनकी जीवनशैली आधारित सोच में है। आज के दौर में बदलती दिनचर्या, खान-पान और जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों के बीच स्वस्थ जीवन के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ऐसे में आयुर्वेद के सिद्धांतों और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच संवाद को मजबूत करना उपयोगी साबित हो सकता है।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड में आयुर्वेद और योग से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने से स्थानीय स्तर पर शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य सेवाओं और वेलनेस से जुड़े नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। राज्य की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में संस्थागत प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद की प्राचीन विरासत को आधुनिक संदर्भों में आगे ले जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए ऐसे संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है, जहां परंपरा और आधुनिकता दोनों का समन्वय देखने को मिले।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री Madan Kaushik, योग गुरु Swami Ramdev, विधायक Adesh Chauhan, रवि बहादुर, पूर्व कैबिनेट मंत्री Swami Yatishwaranand और Acharya Bal Krishna समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का शुभारंभ ऐसे समय में हुआ है, जब पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गुरुकुलम् की स्थापना से आयुर्वेद के अध्ययन, ज्ञान के संरक्षण और नई पीढ़ी को इस प्राचीन चिकित्सा परंपरा से जोड़ने की दिशा में एक नया संस्थागत आधार तैयार होने की उम्मीद है।

