देहरादून ; 21.09.2026।
उत्तराखंड में मदरसों के नियमन और उनकी मान्यता की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शिक्षा विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने वाले 89 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश शासन से की है। प्राधिकरण का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया में शामिल नहीं होने वाले इन संस्थानों के संचालन को नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। ऐसे में इनके खिलाफ तालाबंदी की कार्रवाई किए जाने की तैयारी है।
मदरसों के पंजीकरण के लिए 30 सितंबर की समयसीमा तय की गई है। इसके नजदीक आते ही विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच और पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। प्रदेश में कुल 452 मदरसों को चिन्हित किया गया था। इनमें से कई संस्थान या तो बंद हो चुके हैं, मान्यता की प्रक्रिया में हैं अथवा निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं।
अधिकारियों के मुताबिक अब तक 200 मदरसों ने मान्यता के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। वहीं, 34 संस्थानों को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान के तौर पर प्रमाण पत्र भी मिल चुका है। इन संस्थानों से जुड़े भूमि दस्तावेज, शैक्षणिक व्यवस्था और अन्य जरूरी अभिलेखों की जांच की जा रही है। जांच में निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को आगे प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
21 मदरसों पर पहले ही लग चुकी है सील
मदरसों की जांच के दौरान देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में संचालित 21 ऐसे मदरसों को पहले ही सील किया जा चुका है, जिन्हें नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया था। इसके अलावा 108 मदरसों ने स्वयं संस्थान बंद करने के संबंध में शासन को पत्र दिया है। इनमें सबसे अधिक 104 मदरसे हरिद्वार जिले के बताए गए हैं।
प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार 452 चिन्हित मदरसों में से 363 संस्थान किसी न किसी स्तर पर प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं। इनमें बंद किए गए संस्थान, मान्यता प्राप्त मदरसे और पंजीकरण अथवा प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में चल रहे संस्थान शामिल हैं। इसके बाद 89 मदरसे ऐसे बचे हैं, जिनके संबंध में शिक्षा विभाग के पास पंजीकरण का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
अक्टूबर तक करीब 100 संस्थानों को प्रमाण पत्र मिलने की उम्मीद
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को उम्मीद है कि अक्टूबर के अंत तक लगभग 100 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान का प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित संस्थानों के भूमि रिकॉर्ड, भवन और अन्य जरूरी प्रमाण पत्रों की जांच जारी है। निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले संस्थानों को ही प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्राधिकरण के चेयरमैन डा. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, मान्यता प्राप्त मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में यदि कक्षा एक से आठ तक पढ़ाई संचालित हो रही है, तो उन्हें पीएम पोषण योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक सत्यापन पूरा किए जाने के बाद इस दिशा में आगे की कार्रवाई होगी।
इस व्यवस्था के लागू होने से पात्र संस्थानों में पढ़ने वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को योजना के तहत मिलने वाली पोषण संबंधी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल विभाग का जोर पहले पंजीकरण, दस्तावेजों की जांच और संस्थानों की स्थिति स्पष्ट करने पर है।

