25 june 2026,
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मानसून को देखते हुए राज्य के लाखों राशन कार्ड धारकों के लिए एक अहम और राहत भरा निर्णय लिया है। अब जुलाई महीने से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले पात्र लाभार्थियों को एक साथ तीन महीने का राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत जुलाई, अगस्त और सितंबर का खाद्यान्न एक ही बार में वितरित किया जाएगा, जिससे बारिश और भूस्खलन के दौरान खाद्यान्न आपूर्ति बाधित होने की समस्या से लोगों को राहत मिल सके।
मानसून को देखते हुए लिया गया फैसला
उत्तराखंड के कई पहाड़ी जिले हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी समस्याओं से जूझते हैं। ऐसे में कई बार दूरस्थ गांवों तक समय पर राशन पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अग्रिम वितरण की योजना तैयार की है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस बार पहले से ही गोदामों में पर्याप्त मात्रा में गेहूं, चावल और अन्य जरूरी खाद्यान्न का भंडारण कर लिया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में आपूर्ति बाधित न हो।
किन लोगों को मिलेगा लाभ
यह सुविधा मुख्य रूप से उन राशन कार्ड धारकों को दी जाएगी जो:
- पर्वतीय और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं
- जहां मानसून में सड़क संपर्क अक्सर टूट जाता है
- और जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के अंतर्गत पात्र हैं
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार बारिश के मौसम में खाद्यान्न की कमी से परेशान न हो।
वितरण की प्रक्रिया कैसे होगी
राशन वितरण प्रणाली को इस तरह से व्यवस्थित किया गया है कि:
- जुलाई में ही तीनों महीनों का कोटा एक साथ दिया जाएगा
- उचित मूल्य की दुकानों (राशन दुकानों) को अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है
- लाभार्थियों को एक बार में ही पूरा कोटा लेने के लिए सूचना दी जाएगी
विभाग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वितरण के दौरान किसी भी तरह की भीड़ या अव्यवस्था न हो, इसके लिए अलग-अलग समय स्लॉट बनाए जाएं।
पहाड़ी क्षेत्रों पर विशेष फोकस
इस योजना में खास ध्यान चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे जिलों पर दिया गया है, जहां मानसून के दौरान अक्सर भौगोलिक चुनौतियां बढ़ जाती हैं। कई गांव ऐसे हैं जो बारिश के समय पूरी तरह से कट जाते हैं।
इन क्षेत्रों में पहले से ही राशन का अग्रिम भंडारण कर दिया गया है, ताकि सड़कें बंद होने की स्थिति में भी लोगों तक खाद्यान्न पहुंच सके।
लोगों को क्या फायदा होगा
इस निर्णय से लाभार्थियों को कई स्तर पर राहत मिलेगी:
- बार-बार राशन लेने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
- बारिश और आपदा के समय खाद्यान्न की चिंता नहीं रहेगी
- प्रशासन पर आपूर्ति का दबाव कम होगा
- ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी
सरकार की तैयारी और निगरानी
खाद्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
साथ ही, आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि सड़क बाधित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत लागू की जा सके।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह कदम मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे न सिर्फ दूरस्थ इलाकों के लोगों को राहत मिलेगी बल्कि राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भी अधिक मजबूत और प्रभावी बन सकेगी।

